बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव पर घमासान

उच्च शिक्षा मंत्री बोले शासन के पास प्रस्ताव आने पर ही होगा फैसला
भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। जहां कांग्रेस इसे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताकर राज्यपाल के पास जाने की तैयारी में है, वहीं छात्र संगठनों और सामाजिक कमेटियों ने सड़क पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है। दूसरी तरफ, सरकार ने फिलहाल इस मामले से दूरी बनाते हुए गेंद यूनिवर्सिटी के पाले में डाल दी है।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला आजाद भारत के महान क्रांतिकारी रहे हैं, उनका नाम हटाना देश के क्रांतिकारियों का अपमान है। इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। भाजपा सरकार को इस समय नीटघोटाले और छात्रों के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन शिक्षा मंत्री नाम बदलने की राजनीति में व्यस्त हैं।
मंत्री बोले अभी शासन के पास प्रस्ताव नहीं आया
सियासी पारे के बीच उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद की बैठक में लिया गया है। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी एक स्वायत्त  संस्था है और यह प्रस्ताव अभी सरकार के पास नहीं पहुंचा है। जब प्रस्ताव शासन के पास आएगा, तब इसका पूरा कानूनी और ऐतिहासिक अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद ही सरकार कोई अंतिम फैसला लेगी।
इतिहासकार का दावारू भोपाल में कभी रहे ही नहीं राजा भोज
यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के औचित्य पर इतिहासकार शाहनवाज खान ने एक नया ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने रखा है। उनके दावे ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। खान का कहना है राजा भोज मूल रूप से धार के राजा थे, वे कभी भोपाल में नहीं रहे और न ही यहां उनका कोई महल था। भोपाल के लिए उनका एकमात्र योगदान बड़ा तालाब बनवाना था, जिसके लिए भोपालवासी हमेशा उनके शुक्रगुजार रहेंगे। ऐसे में यूनिवर्सिटी का नाम बदलना तर्कसंगत नहीं है।
सड़क पर उतरा छात्र संगठन
इस विवाद का असर अब कैंपस के बाहर भी दिखने लगा है। छात्र संगठन एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर बैठकर अनोखा प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार की सद्बुद्धि के लिए बकायदा हवन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि स्थापित हो चुकी यूनिवर्सिटी के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ न की जाए। अगर सरकार को वाग्देवी भोजपाल के नाम को सहेजना ही है, तो किसी नए विश्वविद्यालय की स्थापना कर उसे यह नाम दे।
 

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