भारतीय जनता पार्टी ने साल 2026 के राज्यसभा चुनाव और उप-चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की नई सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार कई राज्यों में बड़े संगठनात्मक फेरबदल के संकेत दिए हैं। हाईकमान ने अनुभवी चेहरों और क्षेत्रीय क्षत्रपों पर बड़ा दांव खेला है।
दिग्गजों को मिला मौका, क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश से अपने कद्दावर नेता ताई तागाक को मैदान में उतारा है। वहीं, मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट देकर पूर्वोत्तर में पार्टी ने बड़ा संदेश दिया है। मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया गया है। राजस्थान में भी पार्टी ने बड़ा उलटफेर किया है। यहां से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उच्च सदन भेजने की तैयारी है।
| क्र. |
प्रदेश का नाम |
उम्मीदवार का नाम |
| 1 |
अरुणाचल प्रदेश |
ताई तागाक |
| 2 |
गुजरात |
राजुभाई शुक्ला |
| 3 |
गुजरात |
मुकेशभाई राठवा |
| 4 |
गुजरात |
मानसिंह परमार |
| 5 |
गुजरात |
जितेन्द्र मेघजीभाई कंजारिया |
| 6 |
मध्य प्रदेश |
तरुण चुग |
| 7 |
मध्य प्रदेश |
रजनीश अग्रवाल |
| 8 |
मणिपुर |
ए. शारदा देवी |
| 9 |
राजस्थान |
डॉ. अलका गुर्जर |
| 10 |
राजस्थान |
डॉ. सतीश पूनिया |
गुजरात और ओडिशा के लिए खास रणनीति
गुजरात से भाजपा ने राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा और मानसिंह परमार पर भरोसा जताया है। पार्टी ने यहां आदिवासी और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है। इसके अलावा, ओडिशा में होने वाले राज्यसभा उप-चुनाव 2026 के लिए देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार घोषित किया गया है।
राज्यों का संख्या बल और एनडीए की मजबूत स्थिति
बता दें कि 18 जून 2026 को 24 सीटों पर होने वाला राज्यसभा चुनाव पूरी तरह से राज्यों के मौजूदा विधानसभा संख्या बल पर टिका है। इस चुनाव में विधायकों की संख्या ही सबसे बड़ा फैसला करेगी। मौजूदा समीकरणों को देखकर साफ है कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बेहद फायदे में हैं। वे उच्च सदन यानी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की सबसे मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। इस बार मुख्य चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों पर केंद्रित हो गया है।
गुजरात और राजस्थान का चुनावी गणित
गुजरात और राजस्थान का चुनावी गणित इस बार बेहद दिलचस्प है। गुजरात विधानसभा में भाजपा के पास 156 विधायकों का भारी बहुमत है। इस प्रचंड बहुमत की वजह से भाजपा वहां की सभी चार सीटों पर क्लीन स्वीप करने जा रही है। दूसरी तरफ, राजस्थान की स्थिति थोड़ी अलग है। यहां खाली हो रही तीन सीटों में से संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा को मिलेंगी। वहीं, एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना बिल्कुल तय है। राजस्थान में एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 51 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है।
मध्य प्रदेश का समीकरण और अन्य राज्यों की चुनावी जंग
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां की तीन सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस को मिलने की उम्मीद है। राज्य में कांग्रेस के पास कुल 62 विधायक हैं, जो एक सीट सुरक्षित करने के लिए काफी हैं। बशर्ते कांग्रेस पार्टी के भीतर कोई क्रॉस-वोटिंग न हो। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश की चार सीटों पर भी सत्ताधारी टीडीपी और भाजपा का गठबंधन बेहद मजबूत स्थिति में है। वहीं, कर्नाटक की चार सीटों और झारखंड की दो सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के साथ एनडीए का कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।