उज्जैन कांग्रेस में अपनों का विद्रोह, नई कार्यकारिणी घोषित होते ही मचा बवाल

 बागियों को तरजीह देने पर कार्यकर्ताओं में आक्रोश
भोपाल। उज्जैन शहर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी का ऐलान होते ही संगठन के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। करीब दो साल से अध्यक्ष पद पर काबिज मुकेश भाटी द्वारा शनिवार रात जैसे ही 28 सदस्यीय टीम की घोषणा की गई, पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा सोशल मीडिया पर जमकर निकल रहा है। विवाद की मुख्य वजह निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर उन बागियों को जगह देना है, जिनकी वजह से पूर्व में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
कार्यकारिणी में सबसे ज्यादा विरोध भारत आंजना और दीनू बड़ोदिया की नियुक्ति को लेकर हो रहा है। इन दोनों को सचिव बनाया गया है, जबकि ये पूर्व में कांग्रेस से बगावत कर पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिनकी बगावत ने कांग्रेस को हराया, उन्हें ही संगठन में पद देकर पुरस्कृत किया गया है। इसके अलावा, भाजपा से आए संजय अरोरा को सीधे महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर भी पुराने कार्यकर्ताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है।
उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद
नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय असंतुलन का मुद्दा भी गरमा गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उज्जैन उत्तर  क्षेत्र से कार्यकारिणी में अधिक लोगों को शामिल किया गया है। वहीं उज्जैन दक्षिण मुख्यमंत्री के इस क्षेत्र को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उपेक्षित कांग्रेसी इसे एक साजिश के रूप में देख रहे हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र (दक्षिण) में पार्टी को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि आगामी समय में वहां विपक्ष की सक्रियता कम रहे।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
शनिवार देर रात सूची जारी होने के बाद से ही कांग्रेस के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक पेजों पर मुकेश भाटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि रायशुमारी के बाद दोबारा अध्यक्ष बने भाटी ने अपनी टीम चुनने में निष्ठावानों की जगह व्यक्तिगत पसंद और बागियों को प्राथमिकता दी है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जब बगावत करने वालों को ही संगठन में बड़े पद मिलने हैं, तो सालों तक झंडा उठाने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत का क्या मूल्य रह गया?

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