अपनों की उपेक्षा और निष्कासितों को सम्मान, खफा हुए कार्यकर्ता

 

रेखा यादव के बाद अब महेश केवट के विरोध ने बढ़ाई संगठन की चिंता
भोपाल।  निगम-मंडलों की नियुक्तियों ने सत्ता और संगठन के भीतर असंतोष नजर आने लगा है। लंबे समय से मलाईदार पदों का इंतजार कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब नियुक्तियों की सूची में उन नामों को प्रमुखता दी गई जो कभी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर का रास्ता दिखाए गए थे। पूर्व विधायक रेखा यादव के बाद अब मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए महेश केवट की नियुक्ति पर शुरू हुए भारी विरोध ने भाजपा की पेशानी पर बल ला दिए हैं।
विवाद की मुख्य जड़ महेश केवट का वह निष्कासन है, जो साल 2022 में नगर परिषद निवाड़ी के चुनावों के दौरान हुआ था। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने अनुशासनहीनता के चलते केवट को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जब निष्कासन की अवधि में अभी भी 2 साल शेष हैं, तो ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी थी कि उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देकर नवाजा गया? पार्टी के भीतर उठ रहे स्वर अब सीधे नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक तरफ अनुशासन की दुहाई दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी से निकाले गए नेताओं को पुरस्कृत किया जा रहा है। वर्षों से दरी बिछाने वाले और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार किए जाने से कैडर में निराशा का भाव है। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के खिलाफ जिस तरह सड़कों पर नारेबाजी हुई, वैसा ही नजारा अब केवट की नियुक्ति के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।


Leave Comments

Top