इमेज स्रोत, Getty Imagesका का दावा है कि भारत और चीन समेत कई देश रूस से तेल ख़रीदकर यूक्रेन युद्ध में उसकी मददर रहे हैं
अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को पारित कर दिया है. इसमें रूस से तेल और गैस ख़रीदने वाले देशों पर कड़े टैरिफ़ लगाने का प्रावधान है.
रूसी ऊर्जा का चीन और भारत सबसे बड़े ख़रीदार हैं. इसके साथ ही ईरान पर लगे प्रतिबंधों को भी कड़ा किया गया है.
सीनेटर लिंडसे ग्राहम की ओर से इस बिल को आगे बढ़ाया गया था. इसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों का समर्थन मिला और अंततः 86 के मुक़ाबले 11 वोटों से पारित किया गया.
साउथ कैरोलाइना के रिपब्लिकन सीनेटर ग्राहम की पिछले महीने यूक्रेन की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद मृत्यु हो गई थी.
वोटिंग से ठीक पहले अपने भाई की सीट पर नियुक्त सीनेटर डार्लिन ग्राहम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ज़िक्र करते हुए कहा, "यह क़ानून पुतिन को वहीं चोट पहुंचाएगा, जहाँ उन्हें सबसे ज़्यादा तकलीफ होगी."
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल करने के लिए इस बिल को पिछले साल तैयार किए गए मूल मसौदे की तुलना में काफ़ी सीमित कर दिया गया है.
ट्रंप ने यूक्रेन को सीधे दी जाने वाली अधिकांश अमेरिकी सहायता बंद कर दी है और इसके बजाय यूक्रेन को हथियार बेचने की नीति अपनाई है, जिसका भुगतान अक्सर अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी करते हैं.
हालांकि, इस बिल को अभी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाक़ी है.