बंगाल उपचुनाव: चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता, टीएमसी के नाम और चिह्न वाले फैसले को दी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 18 Sep 2026 10:24 PM IST

तृणमूल कांग्रेस के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। शुक्रवार को उनके गुट को छह अक्तूबर के उपचुनाव के लिए 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न दिया गया। ममता ने इसे असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण बताते हुए मूल पहचान बहाल कराने की बात कही है। उन्होंने अंतरिम व्यवस्था को समझौता मानने से इनकार किया। आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

Mamata Banerjee Moves Supreme Court Against EC Over TMC Name and Election Symbol Ahead of West Bengal Bypolls

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में की अपील - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ममता बनर्जी ने आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चिह्न पर रोक लगाई गई है। शुक्रवार को आयोग ने छह अक्तूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के गुट को 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न आवंटित किया। इसके बाद ममता ने इस फैसले को अदालत में चुनौती देने का कदम उठाया।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में क्यों चुनौती दी?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को 'असंवैधानिक, गैरकानूनी, अलोकतांत्रिक और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण' बताया है। उन्होंने आयोग पर राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप भी लगाया। ममता का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, नामांकन दाखिल हो चुके थे और उम्मीदवार अपने चुनाव चिह्न जमा कर चुके थे। ऐसे समय में पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न को रोकने का फैसला क्यों लिया गया, इसे लेकर उन्होंने सवाल उठाया है। अब उन्होंने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

ममता के गुट को शुक्रवार को कौन सा चुनाव चिह्न मिला?

शुक्रवार को चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को पश्चिम बंगाल के छह अक्तूबर के विधानसभा उपचुनाव के लिए 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न आवंटित किया। यह व्यवस्था उस समय सामने आई है, जब आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और मूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। ममता ने साफ कहा है कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी। उनका कहना है कि वह तृणमूल कांग्रेस की मूल पहचान और पुराने चुनाव चिह्न को वापस हासिल करने के लिए राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लड़ाई जारी रखे

ममता बनर्जी ने पार्टी को लेकर क्या कहा?

ममता बनर्जी ने कहा कि वह पीछे नहीं हटेंगी और राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी। उन्होंने कहा, 'हम हार नहीं मानेंगे। हम राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हम यह लड़ाई लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लड़ेंगे।' ममता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को नहीं छोड़ सकतीं, क्योंकि यह वह पार्टी है जिसे उन्होंने 29 साल के संघर्ष, त्याग और राजनीतिक लड़ाइयों के बाद बनाया है।

ममता ने पार्टी के नाम और पहचान को लेकर क्या कहा?

ममता बनर्जी ने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, यह पार्टी उनके जीवन और उसके कार्यकर्ताओं का हिस्सा रहेगी। उन्होंने कहा कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को छोड़ नहीं सकतीं। उनके मुताबिक, पार्टी की पहचान केवल नाम या चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 29 साल के संघर्ष और कार्यकर्ताओं से जुड़ी हुई है। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले के बाद भी वह पार्टी की मूल पहचान और चिह्न को बहाल कराने की लड़ाई जारी रखेंगी।

नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर क्या बदला?

छह अक्तूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले शुक्रवार का घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहा। एक ओर चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया, वहीं दूसरी ओर ममता ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ममता ने कहा कि वह आयोग की अंतरिम व्यवस्था को अंतिम समाधान के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी। अब उनकी कानूनी चुनौती के बाद पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अदालत के सामने है। ममता ने दोहराया है कि वह इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।


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