नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पर पटवारियों के विरोध के कारण रजिस्ट्री का काम दूसरे दिन भी शुरू नहीं हो स
सरकार ने 17 सितंबर से गांवों में जाकर पटवारियों के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने के विरोध में उन्होंने काम करने से इंकार कर दिया।
इसके बाद उन्हें भू-अधिकार पत्र देकर संबंधित मकानों की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। पटवारियों के विरोध से फिलहाल यह प्रक्रिया अटक गई है।
कलेक्टर बोले- प्रदेश स्तर पर चल रही बातचीत
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि आबादी की जमीन पर काबिज लोगों के नाम पहले ही खसरे में दर्ज किए जा चुके हैं। रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को लेकर पटवारी संगठन की ओर से विरोध सामने आया है।
इस मामले में प्रदेश स्तर पर बातचीत चल रही है और जल्द ही रजिस्ट्री का काम शुरू कराया जाएगा।
नाम में अंतर से बढ़ेगा विवाद
मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने प्रमुख सचिव राजस्व को दिए पत्र में योजना के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया है।
संघ का कहना है कि कई मामलों में भू-अधिकार पत्र में दर्ज नाम और आधार कार्ड में दर्ज नाम खसरे में दर्ज नाम से अलग हैं।
ऐसी स्थिति में यदि रजिस्ट्री हो गई और बाद में नाम में सुधार की जरूरत पड़ी तो मामला सिविल कोर्ट तक जा सकता है। इससे भविष्य में विवाद बढ़ने की आशंका है।
संघ के प्रांताध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि प्रमुख सचिव को स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कराने में आने वाली व्यावहारिक और कानूनी समस्याओं से अवगत कराया गया है।
पटवारियों को कानूनी जोखिम की चिंता
पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद गिरी और प्रांतीय पटवारी संघ के संदीप शर्मा के अनुसार एक-एक मकान की रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने से भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में उनके कानूनी दायित्व को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है।
इसी को लेकर पटवारी संघ स्तर पर शासन से बातचीत चल रही है। शासन के साथ चर्चा और सहमति के बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर निर्णय लिया जाएगा।