केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से मुलाकात की और राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे, चिकित्सा शिक्षा, विशेष स्वास्थ्य सेवाओं और जन स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख योजनाओं पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान श्री नड्डा ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों की सराहना की। उन्होंने खास तौर पर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के उपयोग की सराहना की।

राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। मध्य प्रदेश में 2026 में MBBS की सीटें 5,600 से बढ़कर 6,120 हो गई हैं। यानी एक साल में 520 सीटों की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षा का भी विस्तार हुआ है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर-स्पेशियलिटी की सीटें 63 से बढ़कर 73 और निजी मेडिकल कॉलेजों में 29 से बढ़कर 53 हो गई हैं।
श्री नड्डा ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी मानव संसाधन मजबूत होंगे और लोगों को बेहतर एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए PPP मॉडल के नए तरीके से इस्तेमाल के लिए भी मध्य प्रदेश की सराहना की। इस पहल के तहत धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों को दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने और लोगों के करीब विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री नड्डा ने राज्य सरकार के उस प्रयास की सराहना की, जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए सरकारी निवेश के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को जोड़ा जा रहा है।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख आंकड़ों में हुए सुधार की भी समीक्षा की गई। SRS 2022–24 के अनुसार, मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 7 अंकों की कमी के साथ प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 135 हो गई है। NFHS-6 के अनुसार, चार या उससे अधिक बार प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने वाली गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत 57.5% से बढ़कर 69.5% हो गया है। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों में भी सुधार हुआ है। नवजात मृत्यु दर 27 से घटकर 26 और शिशु मृत्यु दर 37 से घटकर 35 प्रति 1,000 जीवित जन्म हो गई है।

राज्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी मजबूत हुई है। 52 जिलों में 70 हीमोडायलिसिस इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि 52 कैंसर डे-केयर सेंटर कैंसर के इलाज की सेवाएं दे रहे हैं। इंदौर स्थित शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में CAR-T सेल थेरेपी जैसी उन्नत कैंसर उपचार सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।
नई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे का भी विस्तार हो रहा है। छतरपुर, दमोह और बुधनी में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि उज्जैन का मेडिकल कॉलेज 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की फेज-III योजना के तहत राजगढ़ और मंडला में भी मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं।
श्री नड्डा ने मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नए तरीकों को अपनाने के लगातार प्रयासों की सराहना की।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच लगातार सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
बैठक में केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एक मजबूत, सभी के लिए सुलभ और लोगों की जरूरतों पर केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव; मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह; मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के CEO डॉ. सुनील कुमार बरनवाल भी उपस्थित थे।
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