कांग्रेस में फिर गुटबाजी आई सतह पर, अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी

अपने ही उठा रहे नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल
भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द होने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। इस बड़ी लापरवाही ने प्रदेश कांग्रेस में गहरे तक पैठी गुटबाजी और संगठनात्मक कमियों को सरेआम उजागर कर दिया है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक मचे इस घमासान के बीच, कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई है। वहीं, डैमेज कंट्रोल में जुटी प्रदेश कांग्रेस कमेटी अब उन नेताओं पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी में है, जो इस संकट के बहाने नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं।
नामांकन खारिज होते ही कांग्रेस का आंतरिक असंतोष सोशल मीडिया पर फूट पड़ा। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की निर्णय प्रक्रिया और शीर्ष नेताओं को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, पीसीसी ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है और ऐसे बागी सोशल मीडिया पोस्ट्स तथा बयानों की एक सूची तैयार की जा रही है। पार्टी लाइन से भटकने वाले इन पदाधिकारियों के खिलाफ आने वाले दिनों में निष्कासन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होना लगभग तय है।
हाईकमान की रिपोर्ट की तलब
केंद्रीय नेतृत्व ने पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट तलब की है। चर्चा है कि इस उच्च स्तरीय समीक्षा में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी सहित तमाम बड़े नेताओं की भूमिका और जवाबदेही तय की जाएगी। हाईकमान यह जानने के लिए कड़ा रुख अपनाए हुए है कि इतनी बड़ी कानूनी चूक आखिर किसकी लापरवाही से हुई।
संगठन में बदलाव के आसार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना महज एक चुनावी विफलता नहीं है, बल्कि यह प्रदेश कांग्रेस में एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल की भूमिका है। आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन की पूरी संरचना और आगामी चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 


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