कहा सिंधिया समर्थकों के दबदबे से उपेक्षित हैं पुराने कार्यकर्ता
भोपाल। प्रदेश भाजपा में पुराने बनाम नएश् नेताओं की दबी-छिपी खींचतान अब खुलकर सड़कों और बयानों में आने लगी है। बिजली कटौती के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य को अब पूर्व विधायक ममता मीना का खुला साथ मिल गया है। ममता मीना ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों वाली नई भाजपा के बढ़ते दबदबे के कारण पार्टी के पुराने, निष्ठावान नेता और जमीनी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित और घुटन भरा महसूस कर रहे हैं।
पूर्व विधायक ममता मीना ने पन्नालाल शाक्य को संगठन का एक समर्पित और जमीनी नेता बताते हुए उनके रुख का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में बिजली कटौती से किसान, छात्र और व्यापारी त्रस्त हैं। चाचौड़ा क्षेत्र में रात-रात भर बिजली गायब रहती है और दिन में मेंटेनेंस के नाम पर सप्लाई ठप कर दी जाती है। ऐसे में यदि कोई विधायक जनता के हक की आवाज उठाता है, तो उसे गलत ठहराने के बजाय उसका समर्थन किया जाना चाहिए। ममता मीना ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जनता को पर्याप्त बिजली देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। हाल ही के एक प्रशिक्षण वर्ग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब भाजपा में नई और पुरानी का फर्क साफ दिखने लगा है। पहले संगठन में वरिष्ठों और कार्यकर्ताओं को जो सम्मान मिलता था, वह अब गायब होता जा रहा है।
भाजपा के विवाद में कूदी कांग्रेस
इस पूरे अंतर्कलह में अब विपक्ष ने भी एंट्री मारी है। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के सुर में सुर मिलाया है। जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और ऊर्जा मंत्री को राजनीति करने के बजाय इस वास्तविक संकट का समाधान खोजना चाहिए।
यह है विवाद, कार्रवाई के दिए संकेत
गौरतलब है कि पिछले दिनों बिजली विभाग के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने मंच से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और परोक्ष रूप से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तीखे बाण चलाए थे। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष ने विधायक के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया था और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए थे।