अमेरिका जाने से पहले सोच लें, करियर एक्सपर्ट की चेतावनी-अच्छी नौकरी छोड़ यूएस जाना पड़ सकता है भारी

United States में वीजा और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच एक भारतीय करियर एक्सपर्ट की चेतावनी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। एक्सपर्ट ने साफ कहा है कि हर किसी के लिए अमेरिका जाना समझदारी भरा फैसला नहीं होता और कई भारतीय प्रोफेशनल्स पहले से ही भारत में बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने खास तौर पर तीन तरह के लोगों को 2026 में अमेरिका जाने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बिना पूरी तैयारी और वास्तविक स्थिति समझे अमेरिका शिफ्ट होना करियर और आर्थिक भविष्य दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

Anushk Sharma ने लिंक्डइन पर साझा किए गए अपने पोस्ट में कहा कि हाल ही में उनके एक दोस्त ने अमेरिका में मास्टर्स करने को लेकर सलाह मांगी थी। वह दोस्त बेंगलुरु में सालाना 18 लाख रुपये कमा रहा था। इस पर उन्होंने उसे सीधे “नहीं” कहा। शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका जवाब अमेरिका विरोधी सोच के कारण नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि उनका दोस्त पहले से ही उस स्थिति में था, जहां पहुंचने के लिए हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्र संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि अमेरिका जाने से उनकी जिंदगी और करियर अपने आप बेहतर हो जाएंगे, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग हो सकती है। पोस्ट में उन्होंने तीन प्रकार के लोगों को अमेरिका जाने से पहले दोबारा सोचने की सलाह दी।

पहली श्रेणी उन लोगों की बताई गई है जो भारत में कंप्यूटर साइंस, आईटी या डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में 15 से 20 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। शर्मा के अनुसार ऐसे लोग पहले से मजबूत स्थिति में हैं और अमेरिका जाकर जरूरी नहीं कि उन्हें इससे बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि कई बार पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद मिलने वाली शुरुआती सैलरी भी भारत में छोड़ी गई नौकरी के बराबर नहीं होती। ऐसे लोगों के लिए अमेरिका जाना “अपग्रेड” नहीं बल्कि “जुआ” साबित हो सकता है।

दूसरी श्रेणी उन लोगों की है जो बिना किसी मजबूत स्किल के केवल डिग्री के भरोसे अमेरिका जाना चाहते हैं। शर्मा ने कहा कि मौजूदा समय में केवल बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और एमआईटी जैसे संस्थानों के छात्रों को भी बिना वास्तविक स्किल के नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक कंपनियां अब केवल डिग्री नहीं बल्कि वास्तविक काम करने की क्षमता रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं।

तीसरी श्रेणी उन लोगों की बताई गई है जिनकी आर्थिक स्थिति अमेरिका में पढ़ाई या बसने के लिए मजबूत नहीं है। शर्मा ने चेतावनी दी कि गलत समय पर लिया गया बड़ा एजुकेशन लोन कई वर्षों का आर्थिक बोझ बन सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में नौकरी मिलने में देरी, कम शुरुआती वेतन और लंबा जॉब हंट कई परिवारों को गंभीर आर्थिक दबाव में डाल सकता है। साथ ही उन्होंने OPT यानी Optional Practical Training की समय सीमा का भी उल्लेख किया और कहा कि यह किसी की आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार नहीं करती।

पोस्ट में शर्मा ने यह भी कहा कि अमेरिका का सपना वास्तविक जरूर है, लेकिन इसे बिना सोचे-समझे अपनाना खतरनाक हो सकता है। उनके अनुसार विदेश में पढ़ाई या नौकरी को हमेशा “डिफॉल्ट विकल्प” नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे एक “कैलकुलेटेड रिस्क” की तरह देखना चाहिए।

इस बीच अमेरिका में वीजा नियमों, इमिग्रेशन जांच और टेक सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर पहले से ही भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बनी हुई है। हाल के महीनों में कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि नौकरी बाजार पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में करियर एक्सपर्ट की यह चेतावनी सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का विषय बन गई है।

कई यूजर्स ने शर्मा की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते टेक सेक्टर और स्टार्टअप कल्चर के कारण अब देश में भी बेहतर अवसर मौजूद हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका अब भी करियर ग्रोथ और ग्लोबल एक्सपोजर के लिए बड़ा मंच बना हुआ है, लेकिन वहां जाने से पहले आर्थिक स्थिति, स्किल और करियर लक्ष्य का गंभीर मूल्यांकन जरूरी है।

करियर विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने का फैसला केवल सोशल मीडिया ट्रेंड, दोस्तों के अनुभव या “विदेशी सपने” के आधार पर नहीं लेना चाहिए। बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सही तैयारी, मजबूत कौशल और स्पष्ट करियर योजना ही किसी भी अंतरराष्ट्रीय अवसर को सफल बना सकती है।

 


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