भाजपा के बाद अब प्रदेश में कांग्रेस के शुरू होंगे प्रषिक्षण कार्यक्रम

कांग्रेस का मण्डलम कार्ड, रीवा संभाग से होगी शुरुआत
भोपाल। प्रदेश की सियासत में इन दिनों प्रशिक्षण के जरिए संगठन को धार देने की होड़ मची है। एक तरफ जहां सत्ताधारी दल भाजपा पूरे प्रदेश में अपना सांगठनिक शिकंजा कसने में जुटी है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी जमीन पर खुद को मजबूत करने के लिए पलटवार की तैयारी कर चुकी है। भाजपा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के समापन के ठीक बाद कांग्रेस अपना विशेष प्रशिक्षण शिविर शुरू करने जा रही है। साफ़ है कि आगामी चुनावों से पहले दोनों ही दल अपने कार्यकर्ताओं को वैचारिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह मुस्तैद कर देना चाहते हैं।
वर्तमान में भाजपा प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों में दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान चला रही है। इसके तहत जिला स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, विचारधारा और चुनावी प्रबंधन जैसे गंभीर विषयों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। भाजपा का यह अभियान 31 मई तक चलेगा। भाजपा के इस अभियान के खत्म होते ही कांग्रेस मैदान में उतरेगी। माना जा रहा है कि मई के आखिरी हफ्ते से कांग्रेस का यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा जहां व्यापक स्तर पर कमान संभाल रही है, वहीं कांग्रेस ने इस बार अपनी रणनीति को बेहद केंद्रित (लेजर-फोकस्ड) रखा है। मण्डलम प्रमुखों को सीधे ट्रेनिंग देकर कांग्रेस सीधे तौर पर ग्राउंड जीरो की सियासत को प्रभावित करने की तैयारी में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशिक्षण के इस खेल में किसका दांव ज्यादा कारगर साबित होता है।
6 दिनों में 6 जिलों का खाका
कांग्रेस अपने इस मिशन की शुरुआत विंध्य क्षेत्र के रीवा संभाग से करने जा रही है। रीवा संभाग के अंतर्गत आने वाले 6 संगठनात्मक जिलों को साधने के लिए पार्टी ने एक विशेष रोटेशन प्लान तैयार किया है। पहले दो दिनों में 2 जिलों के मण्डलम प्रमुखों को बुलाकर ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग खत्म होते ही अगले दो दिनों के लिए अन्य 2 जिलों के प्रमुखों को प्रशिक्षित किया जाएगा। अंतिम दो दिनों में बचे हुए 2 जिलों की बारी आएगी। इस माइक्रो-प्लानिंग के जरिए कांग्रेस महज 5 से 6 दिनों के भीतर एक पूरे संभाग के जमीनी ढांचे को री-चार्ज कर देगी।
कांग्रेस की नजर जमीन पर
हालांकि, दोनों दलों के इस प्रशिक्षण अभियान के नजरिए और रणनीति में एक बड़ा बुनियादी अंतर देखने को मिल रहा है। भाजपा का जिला स्तर के विभिन्न वर्ग के नेता व कार्यकर्ता पर फोकस है। वहीं कांग्रेस सीधे जमीनी स्तर के मण्डलम प्रमुख पर ध्यान केन्द्रित किए हुए हैं। भाजपा का उद्देष्य सांगठनिक पकड़ मजबूत करना और वैचारिक धार देना। जबकि कांग्रेस बूथ और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सीधे सक्रिय करना चाह रही है।

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