ग्रामीण वोटबैंक और किसानों को साधने की बड़ी रणनीति
भोपाल। प्रदेश में लंबे समय से लंबित सहकारिता चुनावों को लेकर सियासत गरमा गई है। सूबे में सहकारिता चुनाव कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने और किसानों से जुड़े मुद्दों पर बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए कांग्रेस ने एक बड़ा दांव खेला है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसमें पार्टी के 7 दिग्गज नेताओं को कमान सौंपी गई है।
यह हाईपावर कमेटी पूरे प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के चुनावों में संगठन की सक्रिय, प्रभावी और रणनीतिक भूमिका सुनिश्चित करेगी। पार्टी का मुख्य लक्ष्य सहकारिता व्यवस्था के जरिए सीधे किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच पैठ बनाकर कांग्रेस को जमीनी स्तर पर दोबारा मजबूत करना है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक (10 साल) से सहकारी संस्थाओं के चुनाव नहीं हुए हैं। कांग्रेस द्वारा गठित यह विशेष समिति न केवल सहकारिता चुनाव करवाने की रणनीति तैयार करेगी, बल्कि किसानों से जुड़े ज्वलंत और महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सीधे तौर पर मोर्चा संभालेगी। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस का ग्रामीण वोटबैंक को दोबारा हासिल करने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
समिति में इन नेताओं को मिली जगह
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा बनाई गई इस 7 सदस्यीय समिति में प्रदेश कांग्रेस के उन कद्दावर और अनुभवी चेहरों को जगह दी गई है, जिन्हें सहकारिता और ग्रामीण राजनीति का लंबा अनुभव है। समिति में अरुण यादव (पूर्व अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस), अशोक सिंह (राज्यसभा सदस्य), डॉ. गोविंद सिंह (पूर्व सहकारिता मंत्री), भगवान सिंह यादव (पूर्व मंत्री), भंवर सिंह शेखावत (विधायक), चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी (पूर्व प्रदेश महामंत्री) और वीरेंद्र गिरी गोस्वामी (पूर्व अध्यक्ष, राज्य वन उपज संघ) को सदस्य बनाया है।