'नारी शक्ति पुरुषों के बराबर अधिकारों की हकदार'
विधानसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान विधायक व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि यह केवल एक विषय नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला मुद्दा है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति पुरुषों के बराबर अधिकारों की हकदार है और सदन को रानी लक्ष्मीबाई व अहिल्याबाई होलकर के सुशासन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में महिलाओं की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है और भारत भी उन देशों में शामिल हो सकता है, जहां 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। खंडेलवाल ने जोर देते हुए कहा कि जब तक आधी आबादी को पूरा न्याय नहीं मिलेगा, तब तक महिला विकास की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती।
अमेरिका में सात लाख की आबादी पर एक सांसद है, पाकिस्तान में पांच लाख की आबादी पर और ब्रिटेन में 70 हजार की आबादी पर एक सांसद है। हमारे यहां 30 लाख से अधिक लोगों पर एक सांसद है। वर्तमान की 543 सीट 1971 की 54 करोड़ जनसंख्या पर थी। आज हमारे देश की जनसंख्या 124 करोड़ के पार है। सीट बढ़ने से संसद पर दबाव भी काम होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा- भाजपा महिला आरक्षण टाल रही
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल द्वारा महिलाओं को तत्काल प्रभाव से वर्तमान सीटों पर 33% आरक्षण देने के लिए लाए गए अशासकीय संकल्प को सरकार द्वारा स्वीकार न करना यह स्पष्ट करता है कि भाजपा की मंशा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक दिखावा है। महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से उठाते रहेंगे।
सिंघार ने कहा कि भाजपा के प्रस्ताव में साफ है कि आरक्षण 2028-29 के बाद, परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उनका कहना था कि यह महिलाओं को तत्काल लाभ देने की मंशा नहीं दिखाता। उन्होंने बताया कि विपक्ष की मांग है कि वर्तमान सीटों के आधार पर ही विधानसभा और लोकसभा में तुरंत महिला आरक्षण लागू किया जाए।
'कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि महिलाओं को आरक्षण मिले'
सदन में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की तस्वीर सामने दिखाई देने वाली थी। इस देश में समय-समय पर समाज सुधारकों ने नारियों के हित में और नारियों को मुख्य धारा में लाने का काम किया है। इसी व्यवस्था को आगे बढ़ने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। महिलाओं को राजनैतिक अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं के हित मे कई योजना बनाई गई हैं। देश की महिलाओं ने पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास किया है। लेकिन कांग्रेस की सोच अच्छी नहीं है। कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि महिलाओं को आरक्षण मिले।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष बोले-परिसीमन क्यों जरूरी?
कांग्रेस विधायक व पूर्व नेता पूर्व नेताप्रतपक्ष अजय सिंह ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को आरक्षण देना है, तो मौजूदा सीटों के आधार पर ही इसे लागू किया जा सकता है, फिर परिसीमन की जरूरत क्यों बताई जा रही है? सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाया गया है। लेकिन सरकार स्पष्ट जवाब देने से बच रही है। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण को टालने के लिए परिसीमन को कारण बनाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश विधानसभा के 27 अप्रैल के विशेष सत्र में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह अलग अंदाज में नजर आए। वे ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि, ट्रैक्टर को बाहर ही रोक दिया गया, लेकिन वे अंदर गेहूं की बालियां लेकर पहुंचे और किसानों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
'किसानों को गेहूं की कम कीमत क्यों दी जा रही है'?
अभिजीत शाह ने कहा कि राजस्थान में भाजपा सरकार किसानों से गेहूं 2735 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है, तो मध्य प्रदेश में किसानों को कम कीमत क्यों दी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें गुमराह किया जा रहा है। यहां भले ही महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है, लेकिन किसानों की परेशानियों पर भी गंभीरता से बात करना जरूरी है।
वाल्मीकि ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कुछ मंत्री महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बयान देते रहे हैं, जो महिला सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सम्मान को लेकर गंभीर है, तो आदिवासी, अनुसूचित जाति और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।