लोकसभा में 6 और विधानसभा में पहुंचीं मात्र 27 महिलाएं, टिकट वितरण में दलों का दोहरा मापदंड
भोपाल। प्रदेश की राजनीति में नारी शक्ति की हुंकार का एक विरोधाभासी चेहरा सामने आया है। एक तरफ जहां प्रदेश की ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाएं 52 प्रतिशत से अधिक सीटों पर नेतृत्व कर प्रधानी की नई इबारत लिख रही हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली (लोकसभा) और भोपाल (विधानसभा) की दहलीज तक पहुंचने की उनकी राह में टिकट वितरण की दीवार खड़ी है। आंकड़ों के आईने में देखें तो सदन में महिलाओं की भागीदारी आज भी प्रतीकात्मकता और संघर्ष के बीच फंसी नजर आती है।
लोकसभा और विधानसभा महिलाओं की उपस्थिति के आंकड़े बताते हैं कि राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट देने में आज भी भारी कंजूसी बरत रहे हैं। लोकसभा 2024 में हुए चुनाव में प्रदेश की 29 सीटों में से केवल 6 सीटों पर महिला सांसद जीतकर पहुंची हैं। विशेष बात यह है कि ये सभी 6 महिलाएं भाजपा की हैं, जबकि कांग्रेस की इकलौती महिला प्रत्याशी हार गईं। इस चुनाव में भाजपा ने छह महिलाओं को टिकट दिए थे, वे सभी जीती है। वहीं कांग्रेस ने मात्र एक महिला को उम्मीदवार बनाया था। रीवा से कांग्रेस ने नीलम अभय मिश्रा को टिकट दिया था, वे चुनाव हार गई थी।
इसी तरह विधानसभा 2023 के चुनाव में 230 सीटों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में आज सिर्फ 27 महिला विधायक सदन पहुंची है। यानी सदन में महिलाओं की मौजूदगी महज 12 प्रतिशत के करीब है। भाजपा ने 11 प्रतिशत और कांग्रेस ने 13 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए, जो उनकी कुल संख्या के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। विधानसभा के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने कुल 56 महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था, जिनमें से मात्र 27 महिला प्रत्याशियों को ही विजय हासिल हुई थी। इसी तरह राज्यसभा में प्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों में महिला प्रतिनिधित्व और भी कम है। भाजपा की 8 में से 3 सीटें महिलाओं के पास हैं, लेकिन कांग्रेस की 3 सीटों में से एक पर भी महिला नहीं है।
पंचायतों में आधी आबादी’ का दबदबा
सदन के ठीक उलट, पंचायत स्तर पर महिलाएं पुरुषों से आगे निकल चुकी हैं। आरक्षण के चलते आज प्रदेश में 2,90,041 निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। 52.84 प्रतिशत भागीदारी के साथ महिलाएं गांव की सरकार चला रही हैं। प्रदेश की 26 जिला पंचायतों की कमान महिला अध्यक्षों के हाथ में है। 179 जनपद अध्यक्ष और 3425 महिलाएं जिला व जनपद सदस्य के रूप में महिलाएं सक्रिय राजनीति का आधार स्तंभ बनी हुई हैं।