जनगणना और परिसीमन की शर्त देरी करने की रणनीति, तुरंत लागू हो 33 फीसदी कोटाः शोभा ओझा
भोपाल। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। पार्टी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार नहीं मिल जाता, संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर संवैधानिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया है। ओझा ने कहा कि आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की शर्तों से जोड़ना सरकार की सोची-समझी रणनीति है ताकि इसे सालों तक टाला जा सके। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। ओझा ने संसद में हुई वोटिंग का हवाला देते हुए बताया कि विधेयक को वांछित समर्थन नहीं मिल सका। उन्होंने दावा किया कि कुल 528 वोटों में से केवल 298 पक्ष में और 230 विरोध में पड़े, जिसके कारण संशोधन उस रूप में पारित नहीं हो सका जैसा सरकार चाहती थी। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है।
विचारधारा पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इन संगठनों का इतिहास कभी महिला समर्थक नहीं रहा। शोभा ओझा ने कहा कि आज उनके महिला हितैषी होने के दावों पर गहरा संदेह होता है। पार्टी की मांग है कि आरक्षण को 2029 के बजाय अभी से, मौजूदा लोकसभा सीटों के दायरे में ही लागू किया जाना चाहिए।
कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें
मीडिया से चर्चा करते हुए ओझा ने मांग की कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए, आरक्षित सीटों के भीतर ही ओबीसी महिलाओं के लिए अलग उप-कोटा तय हो, जनगणना और परिसीमन की बाध्यता को आरक्षण की राह से अलग रखा जाए और महिला सुरक्षा के बढ़ते मामलों में सरकार की ठोस जवाबदेही तय की जाए।