भोपाल। प्रदेश में कार्यरत लगभग 10 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और हक को लेकर राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए इसे कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करार दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से समान काम, समान वेतन लागू करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।
उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर प्रदेश की व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक पड़ोसी राज्यों और केंद्र की तुलना में बेहद कम है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की तुलना में प्रदेश के कर्मचारियों का वेतन 30 से 35 प्रतिशत तक कम है। सिंघार के अनुसार, वर्तमान महंगाई के दौर में इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है। नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा के सबका साथ, सबका विकास नारे पर तंज कसते हुए कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की बदहाली इस मॉडल की असलियत उजागर कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की गरिमा और भविष्य का सवाल है, जिसे सरकार द्वारा अनदेखा किया जा रहा है।
आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण बंद किया जाए
कांग्रेस नेता ने सरकार समान काम, समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए, आउटसोर्सिंग के नाम पर हो रहे कर्मचारियों के शोषण को बंद किया जाए, वेतन विसंगतियों को दूर कर अन्य राज्यों के समान मानदेय दिए जाने की मांग की है। सिंघार ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस इन 10 लाख कर्मचारियों की आवाज बनकर आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।