पुराने कानूनों की जगह लेंगे आधुनिक प्रावधान, जेलें बनेंगी सुधार केंद्र

नए सुधारात्मक अधिनियम’ के नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित
भोपाल। राज्य में जेल प्रबंधन और कैदियों के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह अधिनियम के नए नियमों के मसौदे की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह नया कानून लागू होने के बाद ब्रिटिश काल से चले आ रहे पुराने कानूनों का स्थान लेगा और जेलों को महज़ दंड देने की जगह के बजाय आधुनिक सुधार केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
जेल सुधार संबंधी इस महत्वपूर्ण अधिनियम को जुलाई 2024 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, जिसे उसी वर्ष अगस्त में राज्यपाल की मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, इसके नियम तैयार न होने के कारण ये बड़े सुधार अब तक धरातल पर नहीं उतर सके थे। प्रक्रिया को गति देने के लिए बनाई गई इस नई समिति में जेल विभाग के प्रमुख सचिव के साथ-साथ वित्त, गृह और विधि विभागों के सचिवों को शामिल किया गया है। यह समिति आगामी 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपेगी।
औपनिवेशिक कानूनों से मिलेगी मुक्ति
यह नया अधिनियम देश के गृह मंत्रालय द्वारा जारी मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 पर आधारित है। यह तीन मौजूदा कानूनों की जगह लेगा, जिनमें से दो औपनिवेशिक काल (अंग्रेजों के समय) के हैं प्रिजन्स एक्ट, 1894 और प्रिजनर्स एक्ट, 1900, तथा तीसरा ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1950 है। इस बदलाव के बाद राज्य में जेलों को प्रिजन्स एंड करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस (कारागार और सुधारात्मक संस्थान) के रूप में जाना जाएगा और इसी के अनुरूप विभाग व मुख्यालय के नाम भी बदल दिए जाएंगे।
आधुनिक तकनीक और सुधार पर विशेष जोर
नए अधिनियम में जेलों के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के पुख्ता प्रावधान किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती पेशी, परिजनों से ई-मुलाकात और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए टेलीमेडिसिन की सुविधा, जेल परिसर में अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए मोबाइल डीएक्टिवेट का उपयोग, ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था और अधिक ओपन जेल (खुली जेलों) की स्थापना पर जोर औरं कैदियों में अच्छा आचरण और अनुशासन बनाए रखने के लिए फरलो (छुट्टी) का प्रावधान, साथ ही उन्हें कानूनी सहायता और कौशल विकास के जरिए समाज की मुख्यधारा से जोडने को शामिल किया गया है।
 


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