हरदीप सिंह पुरी को भाजपा ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

भोपाल। भाजपा ने मध्यप्रदेश से खाली हुई राज्यसभा उपचुनाव की सीट के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा की। पुरी वर्तमान में केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे हैं।
यह सीट भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले मुरुगन ने राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कहते हुए राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद प्रदेश भाजपा ने इस सीट के लिए 4-5 संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था, जिस पर विचार-विमर्श के बाद शीर्ष नेतृत्व ने हरदीप सिंह पुरी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई।
12 नवंबर को होना है मतदान
घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, प्रदेश की इस खाली राज्यसभा सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। इसके लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो निर्धारित तिथि को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव में विजयी होने वाले सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक रहेगा।
कांग्रेस ने जताया विरोध
हरदीप सिंह पुरी को राज्यसभा भेजे जाने पर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ‘एपस्टीन फाइल’ के संदर्भ में नैतिकता और महिला सुरक्षा के दावों पर घेरा। उन्होंने मध्यप्रदेश से दलित, आदिवासी या ओबीसी नेता को मौका नहीं देने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, लाड़ली बहना की बात करते हो, लेकिन आज ऐसे व्यक्ति जिसका नाम एपस्टीन फाइल में आया, यह बड़े शर्म की बात है कि भारतीय जनता पार्टी उसे राज्यसभा से भेजना चाहती है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने भाजपा की सोच पर भी सवाल खड़े किए। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज होने के आसार हैं।
  रैलियों से पहले जनसंवाद करेगी भाजपा, विभिन्न वर्गों के बीच पहुंचकर रखेगी अपना पक्ष
भोपाल। आगामी राजनीतिक रैलियों और लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान को धार देने के लिए भाजपा ने व्यापक जनसंपर्क की रणनीति तैयार की है। पार्टी ने तय किया है कि बड़े शक्ति प्रदर्शन से पहले राज्य के प्रमुख महानगरों भोपाल, इंदौर और जबलपुरकृमें व्यापारी, युवा, चिकित्सक, विद्यार्थी और प्रबुद्धजनों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए, ताकि विपक्षी दलों के आंदोलनों के बीच सरकार और पार्टी का पक्ष स्पष्ट रूप से जनता तक पहुंचाया जा सके।
विपक्षी दलों के आंदोलनों की काट और अपने अभियान को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए भाजपा ने जमीनी स्तर पर संवाद का दौर शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत पार्टी प्रदेश के प्रमुख शहरों में समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें और चर्चाएं आयोजित कर रही है। इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्रियों सहित प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेता और राज्य सरकार के मंत्री शामिल होकर विपक्षी राजनीतिक गतिविधियों पर पार्टी का नजरिया रख रहे हैं। इस विशेष संवाद अभियान की शुरुआत राजधानी भोपाल से हो चुकी है, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक निजी कॉलेज पहुंचकर विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। वहीं, व्यावसायिक नगरी इंदौर में भी विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक समूहों के साथ बैठकों का सिलसिला जारी है। पार्टी का मानना है कि इस तरह के सीधे संवाद से युवाओं और समाज के अन्य वर्गों तक पार्टी के विचार अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे।
एक नवंबर को दिग्गजों का जमावड़ा
अभियान को और गति देने के लिए आगामी एक नवंबर को भोपाल में कई बड़े संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और विश्वास सारंग सहित कई वरिष्ठ नेता शिरकत करेंगे। ये नेता अलग-अलग पेशेवर और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधियों से रूबरू होकर अभियान के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।
सिर्फ सभाओं तक सीमित नहीं रहेगा संदेश
भाजपा की इस पूरी कूटनीति का उद्देश्य रैलियों के संदेश को केवल सभास्थलों तक सीमित न रखकर समाज के हर कोने तक पहुंचाना है। पार्टी का मानना है कि जनसंपर्क और संवाद के जरिए जनता के बीच एक अनुकूल माहौल तैयार किया जा सकता है, जिससे आगामी रैलियों को ऐतिहासिक सफलता मिल सके और राजनीतिक विरोधियों को दो-चार होने के लिए मजबूत वैचारिक जमीन मिल सके।
  हिंगणकर को फिर मिली मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी की जिम्मेदारी
 ओमप्रकाश श्रीवास्तव बने राज्य आनंद संस्थान के सीईओ
भोपाल। शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार हिंगणकर की मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के पद पर संविदा सेवा में एक वर्ष का और विस्तार किया है। वहीं, नर्मदा परिक्रमा कर चुके सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, सेवानिवृत्त आईपीएस राजेश कुमार हिंगणकर 1 नवंबर 2026 से अगले एक वर्ष तक मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। उनकी संविदा नियुक्ति की सेवा शर्तें 4 दिसंबर 2024 को जारी मूल आदेश के अनुरूप ही प्रभावी रहेंगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने हिंगणकर को पहली बार वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी के पद पर नियुक्त किया था, जिसके बाद यह उनकी सेवा अवधि में लगातार तीसरी बार की गई वृद्धि है। शासकीय नियमों के तहत संविदा पर कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक सेवाएं दे सकते हैं।
श्रीवास्तव संभालेंगे आनंद संस्थान का कमान
हाल ही में कैबिनेट की बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान का नया सीईओ बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है। जल्द ही सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए जाएंगे। श्रीवास्तव का प्रशासनिक अनुभव काफी समृद्ध रहा है। वे शिवपुरी और रीवा सहित कई प्रमुख जिलों में कलेक्टर रहने के साथ-साथ गृह विभाग के सचिव, आबकारी आयुक्त और जनसंपर्क आयुक्त जैसे अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।                                                                                                                                                                                                                        इंदौर-भोपाल-उज्जैन में 20 लाख रोजगार और 15 नई टाउनशिप का लक्ष्य
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री ने की घोषणा, 2013 करोड़ से अधिक के हुए वित्तीय समझौते
भोपाल। प्रदेश को आधुनिक, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक प्रदेश में 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करना, 12 से 15 नई टाउनशिप विकसित करना तथा 25 से 30 हजार एकड़ क्षेत्र में नियोजित शहरी विकास करना है। इसके साथ ही इंदौर फ्यूचर सिटी के अंतर्गत करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में आवास, उद्योग और रोजगार आधारित एकीकृत विकास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहर अब केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहरी विकास को गति देने के लिए उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026 और मध्यप्रदेश अर्बन अफोर्डेबल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी-2026 के ड्राफ्ट जारी किए। इसके तहत 2037 तक 50 प्रतिशत उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को दोहराते हुए सीएम ने बताया कि राज्य में अब तक लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतारा जा चुका है, जो ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगा।
6 एमओयू का आदान-प्रदान
कॉन्क्लेव के दौरान नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरी बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति और सीवरेज तंत्र को मजबूत करने के लिए 6 महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान किया। इनमें तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए 2,013.81 करोड़ की बैंक ऋण व्यवस्था शामिल है। उज्जैन मंदिर सर्किट के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच 643.39 करोड़ का ऋण समझौता हुआ। इसके अलावा  इंदौर जल एवं सीवरेज परियोजना के लिए इंदौर नगर निगम और बैंक ऑफ इंडिया के बीच 1,320.42 करोड़ का अनुबंध। वहीं रीवा जल प्रदाय योजना के तहत रीवा नगर निगम और एचडीएफसी बैंक के बीच 50 करोड़ की वित्तीय व्यवस्था।
नीति आयोग की इंदौर इकोनॉमिक रीजन रिपोर्ट जारी
कार्यक्रम में नीति आयोग की इंदौर इकोनॉमिक रीजन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें मालवा-निमाड़ के 8 जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए 60 से अधिक परियोजनाओं का खाका खींचा गया है। इसके अतिरिक्त भोपाल व इंदौर नगर निगम की सतत विकास रिपोर्ट और मध्यप्रदेश एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026 के प्रारूप को जन-परामर्श के लिए सार्वजनिक किया गया। मुख्यमंत्री ने महाकाल महालोक के बाद उज्जैन में बढ़े धार्मिक पर्यटन (वार्षिक 7 करोड़ श्रद्धालु) और इंदौर-अबू धाबी सीधी हवाई सेवा का उल्लेख करते हुए क्षेत्रीय आर्थिक विकास में तेजी आने की बात कही।
शहर आर्थिक विकास के इंजन
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि 2047 तक देश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरों में होगी, इसलिए शहरीकरण को विकास के केंद्र में रखना अनिवार्य है। उन्होंने इंदौर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण मॉडल (24 घंटे में 12 लाख पौधे लगाने का रिकॉर्ड) की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर अब देश के प्रमुख आईटी हब के रूप में उभर रहा है। कॉन्क्लेव में सीएम डॉ. यादव ने अर्बन इनोवेशन गैलरी का अवलोकन किया तथा 6 डी वर्चुअल रियलिटी तकनीक से महाकाल भस्म आरती का अनुभव भी लिया। उन्होंने उद्योगपतियों व निवेशकों से मध्यप्रदेश के इस परिवर्तनकारी सफर में भागीदार बनने का आह्वान किया।
 विधानसभा बनेगी हायटेक, अगला सत्र होगा पूरी तरह पेपरलेस
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा प्रश्नों की संख्या 700 से बढ़कर हुई 4,000
भोपाल।  मध्यप्रदेश विधानसभा अब तकनीक के दौर में एक नया इतिहास रचने जा रही है। डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य विधानसभा का आगामी सत्र पूरी तरह पेपरलेस आयोजित किया जाएगा। ई-विधानसभा व्यवस्था लागू होने से न केवल सदन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और कुशलता आएगी, बल्कि आम जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाकर उनके त्वरित समाधान की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।
यह बात विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आज बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के तहत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कही। समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कागजी और डिजिटल व्यवस्था का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पहले जब विधायकों को हस्तलिखित प्रश्न जमा करने पड़ते थे, तब एक सत्र में औसतन महज 700 प्रश्न ही प्राप्त होते थे। हालांकि, ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद यह आंकड़ा उछलकर लगभग 4,000 तक पहुंच गया है। तोमर ने जोर देकर कहा कि ये प्रश्न केवल कागज का पन्ना नहीं, बल्कि विधायकों के माध्यम से गूंजने वाली जनता की आवाज और क्षेत्रीय समस्याएं हैं।
डिजिटल इंडिया से सीधे खातों में पहुंच रहा लाभ
तकनीक के बहुआयामी फायदों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण न केवल समय की बचत करता है, बल्कि काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता में भी सुधार लाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसी दूरदर्शी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक के चलते ही श्किसान सम्मान निधिश् और श्लाड़ली बहना योजनाश् जैसी कल्याणकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री के रूप में अनुभवों को किया साझा
अपने संबोधन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने केंद्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान के अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हमेशा नई तकनीक अपनाने और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम व पारदर्शी इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।
अब नेवा के डिजिटल मंच पर दिखेगी मध्यप्रदेश विधानसभा
नेवा परियोजना की महत्ता रेखांकित करते हुए तोमर ने कहा कि राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन का मुख्य उद्देश्य देश की संसद (लोकसभा व राज्यसभा) और सभी राज्यों की विधानसभाओं की कार्यवाही को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। मध्यप्रदेश विधानसभा में सभी सदस्यों के सक्रिय सहयोग से इस दिशा में तेजी से काम हुआ है और जल्द ही राज्य विधानसभा की संपूर्ण कार्यवाही नेवा पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
नए डीजीपी की नियुक्ति का रास्ता साफ, मकवाणा 30 नवंबर को ही होंगे सेवानिवृत्त
गृह विभाग ने जारी किया आदेश, वरुण कपूर समेत तीन बड़े नाम दौड़ में आगे
भोपाल। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर लंबे समय से बना संशय आखिरकार खत्म हो गया है। गृह विभाग ने बुधवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त होंगे। इस निर्णय के साथ ही 1 दिसंबर 2026 से राज्य को नया पुलिस प्रमुख मिलने का प्रशासनिक मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
दरअसल, कैलाश मकवाणा ने 2 दिसंबर 2024 को प्रदेश के डीजीपी का पदभार ग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत डीजीपी पद पर न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल सुनिश्चित करने की व्यवस्था है। इसी आधार पर पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग को उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 2026 तक बनाए रखने का प्रस्ताव भेजा था। इसी बिंदु पर सेवानिवृत्ति की मूल तिथि और दो साल के नियत कार्यकाल के बीच तकनीकी पेंच फंसा हुआ था। प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे पर जारी चर्चा के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उच्च स्तरीय मंथन के बाद सहमति बनी कि मकवाणा को 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्त किया जाए, जिसके परिपालन में गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया।
यूपीएससी को भेजे गए 12 नाम
राज्य सरकार ने नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत वरिष्ठता सूची में शामिल 12 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजे जा चुके हैं। यूपीएससी इन नामों की स्क्रूटनी करने के बाद तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार कर राज्य सरकार को वापस भेजेगा, जिसमें से किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
दौड़ में इन अधिकारियों ने नाम
नए पुलिस कप्तान की रेस में डीजी जेल वरुण कपूर, डीजी ईओडब्ल्यू उपेंद्र जैन और डीजी होमगार्ड प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। नियमों के अनुसार, डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए अधिकारी की सेवा का कम से कम छह महीने का कार्यकाल बचा होना अनिवार्य है। ऐसे में मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने के बाद दावेदारों की प्रशासनिक समीकरण में स्थिति और अधिक स्पष्ट हो गई है।    


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