राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा, 12 नवंबर को होगा मतदान

                                   बहुमत के चलते भाजपा की स्थिति मजबूत
भोपाल।  केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के मुताबिक, इस सीट के लिए आगामी 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम को मतगणना भी संपन्न कराई जाएगी। विधानसभा में संख्याबल के लिहाज से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पलड़ा इस सीट पर  मजबूत नजर आ रहा है।
निर्वाचन आयोग द्वारा तय कार्यक्रम अनुसार उपचुनाव की अधिसूचना 26 अक्टूबर (सोमवार) को जारी की जाएगी। नॉमिनेशन करने के लिए आखिरी तारीख 2 नवंबर  (मंगलवार) है। नाम वापस लेने के लिए अंतिम तिथि 5 नवंबर (गुरुवार) को है. 12 नवंबर  (गुरुवार) को मतदान होगा। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी, इसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गणना की जाएगी। 16 नवंबर  को निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
क्यों खाली हुई थी सीट?
केंद्रीय सूचना प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने गत 13 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता और अपने मंत्री पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहते हैं और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए पूरी शिद्दत से जुटना चाहते हैं। उनके इस त्यागपत्र के बाद से ही यह सीट खाली चल रही थी, जिस पर कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक का बचा हुआ है।
विधानसभा में दलीय स्थिति और भाजपा का पलड़ा
मध्य प्रदेश विधानसभा के वर्तमान संख्याबल को देखें तो सदन में कुल 230 विधायक हैं। इसमें से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 164 विधायक, कांग्रेस के 65 विधायक और भारत आदिवासी पार्टी (बाप) का 1 विधायक है।  राज्य विधानसभा में स्पष्ट बहुमत और विधायकों के मजबूत आंकड़े को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा प्रत्याशी की जीत लगभग तय है।
 डीए बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
भोपाल। दीपावली के ठीक पहले राजधानी भोपाल में कर्मचारियों का असंतोष सड़क पर आ गया है। मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (डीए) दिए जाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी मुखर हो गए हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के बैनर तले राजधानी स्थित डाक भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की गई।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 10 महीनों से उनके महंगाई भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में आर्थिक संकट और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि देश और राज्य में लगातार महंगाई बढ़ रही है, जिससे आम जनता के साथ-साथ शासकीय कर्मचारी भी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में समय पर डीए न बढ़ाया जाना बेहद चिंता का विषय है।
केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के डीए में अंतर
कर्मचारियों ने मुख्य रूप से केंद्र और राज्य के बीच डीए के अंतर पर आपत्ति जताई है। वर्तमान स्थिति के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को मिल रहा डीए 60 फीसदी मिल रहा है। वहीं  मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा डीए  58 फीसदी मिल रहा है।  इस 2 फीसदी के अंतर को खत्म करने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाया है।
दीपावली से पहले राहत की उम्मीद
कर्मचारियों ने राज्य सरकार को चेतावनी भरे लहजे में मांग की है कि दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले उनके डीए में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए, ताकि उन्हें भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वित्तीय राहत मिल सके। यदि मांग जल्द पूरी नहीं होती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
 पटवारी पहुंचे एम्स, घायलों से की मुलाकात, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज भोपाल स्थित एम्स अस्पताल पहुंचकर ग्वालियर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों के परिजनों से भी चर्चा कर घटना की पूरी जानकारी ली और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की ईश्वर से कामना की।
ग्वालियर में हुए इस भीषण सड़क हादसे में 16 लोगों की दर्दनाक मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्री पटवारी ने कहा कि यह दुर्घटना कई परिवारों के जीवन में कभी न भरने वाला शून्य छोड़ गई है। गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि समय रहते उचित सतर्कता बरती जाती, तो अमूल्य जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
25 लाख का मुआवजा दे सरकार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार से मांग की है कि ग्वालियर हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम पच्चीस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च सरकार वहन करे। उन्होंने कहा कि मात्र मौखिक आश्वासन देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि सरकार को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
 मास्टर प्लान 2047 के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान, बैरिकेडिंग कर रोका
66 गांवों की कृषि भूमि रिजर्व श्रेणियों में शामिल करने पर फूटा आक्रोश
भोपाल। भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का नया ड्राफ्ट लागू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। ड्राफ्ट में प्रस्तावित भू-उपयोग बदलावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में क्षेत्र के 66 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में दर्शा दिया गया है, जिससे हजारों परिवारों की खेती और आजीविका पर सीधा संकट मंडराने लगा है।
अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने जब शहर की ओर कूच करने का प्रयास किया, तो पुलिस बल ने नीलबड़ तिराहे पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। प्रशासन के इस रुख से आक्रोशित किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और उग्र नारेबाजी करने लगे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के समय प्रशासन ने आश्वस्त किया था कि नए ड्राफ्ट के निर्माण में संबंधित ग्राम पंचायतों की सहमति ली जाएगी, लेकिन इस बार बिना किसी विचार-विमर्श के निर्णय थोप दिए गए। किसानों की स्पष्ट मांग है कि निर्णय से पूर्व सभी 66 गांवों में ग्रामसभाओं का आयोजन किया जाए, आपत्तियों पर पारदर्शी चर्चा हो और किसानों का पक्ष सुने बिना लैंडयूज (भू-उपयोग) न बदला जाए।
30 दिनों में दर्ज कराएं आपत्तियां
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के संयुक्त संचालक ने कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार और पारदर्शी है। ड्राफ्ट जारी होने के बाद 30 दिनों की समयावधि के भीतर आमजन से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त सभी आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा, जिसके बाद प्रत्येक संबंधित पक्ष को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया जाएगा।
  बीना बनेगा पेट्रोकेमिकल हब, निवेश के नए द्वार खोल रही सरकार
इंडिया केम-2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का निवेशकों को आमंत्रण
भोपाल।  मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख पेट्रोकेमिकल और रसायन उद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार निवेश और औद्योगिक विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है। बीना में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल इकाई, प्लास्टिक पार्क और गैस आधारित उद्योग प्रदेश में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं पैदा करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए सरल, पारदर्शी और उद्योग अनुकूल व्यवस्था विकसित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोकेमिकल्स, पॉलिमर, उर्वरक, विशिष्ट रसायन और दवा निर्माण जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार निवेशकों को जरूरी सुविधाएं, सहयोग और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्योगपतियों को जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
बीना में 50 हजार करोड़ की परियोजना से बढ़ेंगी संभावनाएं
डॉ. यादव ने बताया कि सागर जिले का बीना पेट्रोकेमिकल उद्योग के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां करीब 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल इकाई का भूमि-पूजन हो चुका है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड की लगभग 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर और रिफाइनरी विस्तार परियोजना भी मध्यभारत में सहायक उद्योगों के विकास को गति देगी। इन परियोजनाओं से प्लास्टिक, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल और फार्मा उद्योगों को कच्चा माल मिलने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
प्लास्टिक पार्क से एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता है। रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलौआ में 93 एकड़ में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। तामोट में प्लास्टिक उत्पादों के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए सिपेट का केंद्र भी स्थापित है। धार के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क से वस्त्र, पॉलिमर और रसायन आधारित उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे। वहीं, विजयपुर में गेल का गैस प्रसंस्करण ढांचा और ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र तथा आष्टा की प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल परियोजना भी औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा
डॉ. यादव के अनुसार, पिछले पौने तीन वर्षों में मध्यप्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें करीब 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। प्रदेश में औद्योगिक भूमि, पर्याप्त जल, बिजली, सड़क नेटवर्क, हवाई अड्डे और कंटेनर डिपो जैसी सुविधाएं निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती हैं।
उद्योगपतियों से भी चर्चा
मुंबई में मुख्यमंत्री ने वस्त्र, उर्वरक और फार्मा क्षेत्र के उद्योगपतियों से भी चर्चा की। भीलोस इंडस्ट्रीज की प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 7,500 करोड़ रुपये के निवेश और 3,750 रोजगार की संभावना है। मध्य भारत फॉस्फेट की मेघनगर में 350 करोड़ रुपये की उर्वरक परियोजना तथा ल्यूपिन के करीब 350 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश पर भी विचार-विमर्श हुआ।
रसायन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए किया जाएगा तैयार
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत का पेट्रोकेमिकल उद्योग 2040 तक एक लाख करोड़ डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से रसायन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।
खरीद और निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, वायरल वीडियो पर होगी उच्च स्तरीय जांच
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि विभागीय स्तर पर होने वाली हर खरीदी और निर्माण कार्यों पर पैनी नजर रखी जा रही है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए राज्य मंत्री ने कहा है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सामने आए वीडियो और विभागीय कामकाज पर बात करते हुए राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीदी में यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसकी गहराई से जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह की विसंगतियों के कारणों और तौर-तरीकों का पता लगाने के लिए पोर्टल को समय-समय पर अपग्रेड भी किया जाता है। यदि किसी उत्पाद की कीमत में अत्यधिक अंतर या असंतुलन नजर आता है, तो विभाग उसकी भी विशेष जांच करवाएगा।
पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई पर जोर
राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मंत्री ने दोहराया कि विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी निर्माण कार्यों और क्रय प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, और वायरल वीडियो के आधार पर शुरू होने वाली जांच के परिणाम सामने आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
एसीएस की चेतावनी का वीडियो आया था सामने
गौरतलब है कि भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित समीक्षा बैठक का वीडियो सामने आया है। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के अपर प्रमुख सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को खरीदी में पारदर्शिता बरतने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि विभाग के पास सामान की मात्रा, दर और खर्च का पूरा ब्योरा है। इस साल से खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अतिरिक्त सामान जोड़कर किसी को फायदा पहुंचाने का खेल बंद करने की बात भी कही।


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