भोपाल। हवाई यात्राओं को अत्याधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रदेश सरकार का नया अत्याधुनिक जेट विमान बॉम्बार्डियर चौलेंजर-3500 भोपाल पहुँच गया। लगभग 234 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से खरीदे गए इस विमान का मुख्य उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीवीआईपी) की आधिकारिक यात्राओं के लिए किया जाएगा। कनाडा के टोरंटो से उड़ान भरकर बैंकॉक के रास्ते यह विमान सुरक्षित भोपाल पहुँचा है।
अत्यंत आधुनिक सुविधाओं से लैस इस व्यावसायिक जेट की क्षमता बेहद उत्कृष्ट है। यह विमान लगभग 6,297 से 6,300 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप उड़ान भरने में सक्षम है। इसकी अधिकतम गति करीब 882 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह लगभग 45 हजार फीट की ऊँचाई तक उड़ान भर सकता है। लंबी दूरी की वीवीआईपी यात्राओं को कम समय में और अधिक आरामदायक बनाने के लिए इस विमान को विशेष तौर पर शामिल किया गया है। विमान की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए प्रदेश सरकार लगभग 268 करोड़ रुपये का ऑल-रिस्क बीमा कराने की भी तैयारी कर रही है। इस व्यापक बीमा पॉलिसी के तहत सालाना लगभग दो करोड़ रुपये का प्रीमियम चुकाए जाने का अनुमान है, जिससे विमान से जुड़े हर संभावित जोखिम को कवर किया जा सके।
नियमित संचालन में लगेंगे डेढ़ से दो महीने
यद्यपि विमान भोपाल आ चुका है, लेकिन इसे आधिकारिक और नियमित उड़ान सेवा में शामिल करने से पहले कई आवश्यक कानूनी, तकनीकी और नियामकीय औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की एक विशेष टीम जल्द ही भोपाल पहुंचकर विमान की तकनीकी जांच करेगी। डीजीसीए से आवश्यक अनुमति और तमाम नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह अत्याधुनिक जेट विमान पूरी तरह से नियमित उड़ानों के लिए तैयार हो सकेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है।
ई-अटेंडेंस की तकनीकी खामियों से शिक्षक परेशान
शासकीय शिक्षक संगठन ने लोक शिक्षण आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
भोपाल। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की गई डिजिटल प्रणाली ई-अटेंडेंस शिक्षकों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। खासकर ग्रामीण व दूरस्थ अंचलों में नेटवर्क की लचर व्यवस्था, सर्वर डाउन और ऐप की तकनीकी गड़बड़ियों के चलते शिक्षकों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस समस्या से आक्रोशित शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने शिक्षा विभाग के समक्ष मोर्चा खोलते हुए व्यवस्था में तत्काल व्यावहारिक बदलाव की मांग उठाई है।
संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस प्रणाली में 6 प्रमुख सुधार करने का आग्रह किया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि जब तकनीकी खामियां शिक्षक के नियंत्रण से बाहर हैं, तो उनका खामियाजा वेतन कटौत या वेतन रोकने के रूप में शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए। संगठन ने कहा है कि ई-अटेंडेंस प्रणाली को प्रदेश के सभी अंचलों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षकों को गैर-जरूरी मानसिक व आर्थिक तनाव न झेलना पड़े।
संगठन की प्रमुख मांगें
नेटवर्क या सर्वर ठप होने की स्थिति में स्कूल की पारंपरिक उपस्थिति पंजी और संस्था प्रमुख द्वारा प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर हाजिरी मानी जाए। केवल तकनीकी कारणों से वेतन न काटा जाए, सामान्य स्कूलों के लिए लॉगिन का समय सुबह 9.30 से 11 बजे और लॉगआउट का समय शाम 4 से 6 बजे निर्धारित हो। सुबह की पाली वाले स्कूलों के लिए लॉगिन समय 6.30 से 8 बजे तक तय किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस की 6 घंटे की बाध्यता को घटाकर 5 घंटे किया जाए। ऐप के भीतर ही सभी प्रकार की छुट्टियों के आवेदन और स्वीकृति का सरल विकल्प मौजूद हो। शिक्षकों की आकस्मिक व व्यक्तिगत आवश्यकताओं को देखते हुए पूर्व व्यवस्था के तहत आधे दिन का अवकाश लेने की सुविधा फिर से लागू की जाए। प्रशिक्षण, बैठकों एवं अन्य शासकीय कार्यों के लिए ऑन-ड्यूटी मंजूरी प्रक्रिया को आसान और व्यावहारिक बनाया जाए।
954 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, 400 नए सांदीपनि विद्यालय बनेंगे
मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र, पुलिस स्मृति दिवस पर नौ शहीदों को दी श्रद्धांजलि
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल के रवींद्र भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के दिवंगत कर्मचारियों के 954 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र सौंपे। इस दौरान प्रदेश में 400 नए सांदीपनि विद्यालय भवन बनाने की घोषणा की। वहीं, लाल परेड मैदान में पुलिस स्मृति दिवस समारोह में नौ शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार के कमाने वाले सदस्य के निधन के बाद आश्रितों को आर्थिक संकट से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। नियुक्ति पाने वालों में 661 सहायक ग्रेड-3, 31 प्राथमिक शिक्षक और 262 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 400 नए सांदीपनि विद्यालय भवनों में 200 स्कूल शिक्षा विभाग और 200 जनजातीय कार्य विभाग के तहत बनाए जाएंगे। इन विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाओं, खेल सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर जोर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अब तक विभिन्न विभागों में 85 हजार से अधिक नियुक्तियां दे चुकी है। इसी कड़ी में अब स्कूल शिक्षा विभाग में भी 20 हजार रिक्त पदों को भरा जाएगा। हालांकि, इन भर्तियों के लिए परीक्षा एजेंसी, पदों का वर्गवार विवरण और समय-सारणी जल्द ही विभाग द्वारा अलग से जारी की जाएगी।
350 लंबित मामलों का साल के अंत तक निराकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थी भविष्य की अन्य शासकीय भर्ती परीक्षाओं में भी शामिल हो सकेंगे। प्रदेश में अब तक 85 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। अनुकंपा नियुक्ति के करीब 350 लंबित मामलों का साल के अंत तक निराकरण करने का लक्ष्य है। कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए हर साल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
शहीदों के परिजनों को 50-50 प्रतिशत सहायता
पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कर्तव्य के दौरान प्राण गंवाने वाले नौ पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को नमन किया। मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता के संबंध में बताया कि सहायता राशि का 50 प्रतिशत शहीद की पत्नी और शेष 50 प्रतिशत उनके माता-पिता को देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने पुलिस विभाग में पदोन्नति और नई भर्तियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध और ड्रग तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने पुलिसकर्मियों की पदोन्नति और नई भर्तियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
नक्सलवाद की चुनौती का किया सामना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा है। करीब 35 वर्षों तक प्रदेश ने इसका सामना किया। पुलिस जवानों के साहस, शौर्य और समर्पण ने इस लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर अब सीखेंगे एआई की बारीकियां
आईआईटी गुवाहाटी में 60 शिक्षकों को मिलेगा 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण
भोपाल। डिजिटल युग में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में पदस्थ प्राध्यापक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आधुनिक गुर सीखेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के शिक्षकों को एआई की छोटी से छोटी बारीकियों में पारंगत करने के लिए पांच दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर के 60 चयनित शासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को आईआईटी गुवाहाटी भेजा जाएगा, जहां संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ उन्हें एआई-आधारित आधुनिक शैक्षणिक प्रक्रियाओं का गहन प्रशिक्षण देंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह विशेष कार्यशाला स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत आयोजित की जा रही है। इसके लिए 13 अक्टूबर को उच्च शिक्षा विभाग और आईआईटी गुवाहाटी के मध्य एक महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। उसी समझौते के तहत इस व्यावहारिक कार्यशाला की रूपरेखा तैयार की गई है।
तैयार किए जाएंगे 40 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स
आईआईटी गुवाहाटी से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने वाले प्रोफेसरों में से लगभग 40 से अधिक योग्य शिक्षकों का चयन मास्टर ट्रेनर के रूप में किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर्स दूसरे चरण में भोपाल में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद इस प्रशिक्षण अभियान को संभाग स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि प्रदेश के कोने-कोने में स्थित कॉलेजों तक इसका लाभ पहुँच सके। एआई का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने के बाद ये शिक्षक सीधे कक्षाओं में विद्यार्थियों को एआई की बारीकियों और उसके अनुप्रयोगों से अवगत कराएंगे।
वित्तीय हेराफेरी, तत्कालीन सीएमओ सहित 6 पर ईओडब्ल्यू में एफआईआर
डिजिटल एंट्री में फर्जीवाड़ा कर एरियर व भत्तों का दोहरा भुगतान
भोपाल। प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्वास्थ्य विभाग की सरकारी निधि में लाखों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आईएफएमआईएस पोर्टल पर प्रविष्टियों में हेरफेर कर 60.60 लाख के फर्जी भुगतान और गबन के आरोप में दो तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) समेत छह अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।
ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा 1 अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के बीच डिंडौरी स्थित सीएमएचओ कार्यालय की लेखा शाखा में किया गया। आरोपियों ने उन एरियर राशियों का दोबारा भुगतान प्राप्त करने के लिए पोर्टल पर नेगेटिव एंट्री का सहारा लिया, जिनका मैन्युअल भुगतान पहले ही किया जा चुका था। अकेले इस तरीके से 49.89 लाख की अवैध राशि का आहरण किया गया।
बिना आदेश दिए गए भत्ते और दोहरा भुगतान
जांच में यह भी सामने आया कि वैधानिक आदेशों के बिना मद परिवर्तन कर नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) और गृह भत्ते के नाम पर 5.89 लाख अतिरिक्त बांट दिए गए। इसके अलावा, जुलाई 2024 में लेखा शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू के खाते में बिना किसी दस्तावेजी आधार के 4.78 लाख ट्रांसफर किए गए। वेंडरों को भी दोहरा भुगतान कर डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से राशि संदिग्ध बैंक खातों में भेजी गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व बीएनएस में मामला दर्ज
ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आर.के. मेहरा व डॉ. रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन डीएचओ डॉ. बलदेव सिंह भलावी व डॉ. भरत सिंह टेकाम, सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू और सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते को नामजद आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
दो फीसदी डीए और राहत की मांग को लेकर मुखर हुआ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ
भोपाल। प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान न होने पर तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने आक्रोश जताया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो कर्मचारी और पेंशनर्स इस बार तीखी नाराजगी के साथ विरोध दर्ज कराएंगे।
राजधानी भोपाल स्थित शासकीय केंद्रीय मुद्रणालय में हुई कर्मचारी संगठनों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सरकार की उदासीनता के खिलाफ अब चरणबद्ध तरीके से आवाज बुलंद की जाएगी। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को वर्तमान में 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को अब भी केवल 58 प्रतिशत ही मिल रहा है। पिछले 10 महीनों के दौरान कई प्रमुख त्योहार बीत चुके हैं और अब दीपावली का पर्व नजदीक है, लेकिन सरकार की ओर से डीए बढ़ाने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
आज करेंगे प्रदर्षन
22 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे शासकीय केंद्रीय मुद्रणालय, डाक भवन के सामने भोजन अवकाश के दौरान कर्मचारी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी मांग रखेंगे। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भोजन अवकाश के समय सरकार का ध्यानाकर्षण किया जाएगा।