चंडीगढ़. पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ड्रग्स के कारोबार को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधना तेज कर दिया है. इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले तीन लोगों के परिवारों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया.
अमित शाह ने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. भाजपा इन घटनाओं को राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के रूप में उठा रही है. वहीं, आम आदमी पार्टी भाजपा के आरोपों को खारिज करती रही है.
गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की. झोटा ने कथित तौर पर नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाई थी और उनकी हत्या कर दी गई थी. शाह ने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर संवेदना जताई और न्याय दिलाने का भरोसा दिया.
इस मुलाकात को पंजाब में नशे के मुद्दे पर भाजपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी लगातार राज्य में नशीले पदार्थों की बिक्री और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रही है.
अमित शाह ने संगरूर जिले के कनौई गांव में गुलजार सिंह के परिवार से भी मुलाकात की. जानकारी के मुताबिक, गुलजार सिंह ने कथित तौर पर हेरोइन की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाई थी. इसके बाद विवाद की स्थिति बनी और उन्होंने आत्महत्या कर ली.
परिवार ने इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है. मुलाकात के दौरान गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय मिलने का भरोसा दिलाया है. परिवार की ओर से पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई गई है. इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है.
गृह मंत्री ने गुरदासपुर जिले के बटाला क्षेत्र के माड़ी पन्नवां गांव में बिक्रमजीत सिंह के परिवार से भी मुलाकात की. बताया गया है कि बिक्रमजीत सिंह ने नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध किया था, जिसके बाद धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई.
अमित शाह ने परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया. इन तीनों परिवारों से मुलाकात के जरिए भाजपा ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के मुद्दे को राजनीतिक रूप से प्रमुखता दी है.
पंजाब में नशे का कारोबार लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है. भाजपा इससे पहले राज्यव्यापी 'नशामुक्त पंजाब यात्रा' भी निकाल चुकी है. पार्टी ने संकेत दिए हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में नशे के खिलाफ अभियान उसके प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा.
भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है. पार्टी की रणनीति में नशे के कारोबार, कानून-व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है.
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पंजाब में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच नशे के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं. भाजपा राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि आप भाजपा के आरोपों को खारिज करती रही है.
अमित शाह की पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है. हालांकि, संबंधित मामलों में आरोपों, जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा.