मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को कूनो से आगे बढ़ाने की कवायद जारी है। अब बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता सीसीबी-2 को कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी ले जाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 सितंबर को उसे गांधी सागर में छोड़ेंगे। इसके साथ ही गांधी सागर में चीतों के कुनबे को बढ़ाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ेगा।
फरवरी में भारत आई थी सीसीबी-2
सीसीबी-2 का जन्म बोत्सवाना के घांजी में हुआ था। करीब ढाई साल की उम्र में वह 28 फरवरी 2026 को भारत लाई गई थी। भारत पहुंचने के बाद उसे कूनो नेशनल पार्क में क्वारंटीन में रखा गया। क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद मई में उसे खुले जंगल में छोड़ा गया। कूनो में रहने के दौरान उसने भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल लिया। अब उसे दूसरे चीता आवास में भेजने की तैयारी की गई है।
गांधी सागर में होंगे चार चीते
सीसीबी-2 के पहुंचने के बाद गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में चीतों की संख्या चार हो जाएगी। यहां पहले से दो नर और एक मादा चीता मौजूद है। नई मादा चीता के आने से यहां नर और मादा चीतों का संतुलन भी बदलेगा और प्रजनन की संभावनाओं को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। चीता प्रोजेक्ट में गांधी सागर को कूनो के साथ दूसरे महत्वपूर्ण आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। चीतों को अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्रों में बसाने का उद्देश्य एक से अधिक आबादी विकसित करना है, ताकि लंबे समय में भारत में चीता संरक्षण का दायरा बढ़ाया जा सके।
कूनो के बाहर बढ़ रहा चीता प्रोजेक्ट
भारत में चीता पुनर्स्थापना योजना के तहत अब फोकस केवल कूनो तक सीमित नहीं है। गांधी सागर में चीतों की मौजूदगी इसी विस्तार का हिस्सा है। केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क में कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप में लंबे समय में 60 से 70 चीतों की मेटापॉपुलेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सीसीबी-2 का गांधी सागर पहुंचना इसी बड़े लक्ष्य की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। बता दें मध्य प्रदेश में चीता की संख्या 56 पहुंच गई हैं।