मध्य प्रदेश में अब छोटे अपराधों के लिए जेल की बजाय सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी, जिसे भारतीय नागरिक ...और पढ़ें
मध्य प्रदेश में छोटे अपराधों पर जेल की जगह सामुदायिक सेवा।
बीएनएसएस के तहत पहली बार प्रभावी, 1 जुलाई 2024 से लागू।
अस्पताल सफाई, पौधारोपण जैसे कार्य; सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। अपराध किया हो लेकिन यह पहली बार हो और वह भी ऐसा जिसमें कानून सामुदायिक सेवा की सजा की अनुमति देता है, तो कोर्ट अब दोषी को जेल भेजने के बजाय समाज के लिए काम करने यानी सामुदायिक सेवा की सजा दे सकता है। मध्य प्रदेश में पहली बार सामुदायिक सेवा के दंड को प्रभावी कि
मध्य प्रदेश में छोटे अपराधों पर जेल की जगह सामुदायिक सेवा।
बीएनएसएस के तहत पहली बार प्रभावी, 1 जुलाई 2024 से लागू।
अस्पताल सफाई, पौधारोपण जैसे कार्य; सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। अपराध किया हो लेकिन यह पहली बार हो और वह भी ऐसा जिसमें कानून सामुदायिक सेवा की सजा की अनुमति देता है, तो कोर्ट अब दोषी को जेल भेजने के बजाय समाज के लिए काम करने यानी सामुदायिक सेवा की सजा दे सकता है। मध्य प्रदेश में पहली बार सामुदायिक सेवा के दंड को प्रभावी किया गया है।
इसके तहत दोषी व्यक्ति को अस्पताल में सफाई करने, पौधारोपण करने या समाज के हित में इसी तरह का काम करने की सजा मिल सकती है। देशभर में एक जुलाई, 2024 से प्रभावी किए गए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में इसका प्रविधान किया गया है। प्रदेश में लंबे विचार-विमर्श और हाई कोर्ट के स्तर पर परीक्षण के बाद इसे लागू कर दिया गया है। गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
सामुदायिक सेवा का उद्देश्य दंड के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराना है। मानहानि, नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार, पहली बार चोरी जिसमें संपत्ति का मूल्य पांच हजार रुपये से कम हो, आत्महत्या का प्रयास और लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा जैसे अपराधों में सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
सेवा की अवधि एक से 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक की हो सकती है। निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका रखी गई है।
अधिसूचना में कहा गया है कि सामुदायिक सेवा की सजा पाने वाला व्यक्ति यदि डाक्टर, इंजीनियर, लेखापाल या अधिवक्ता जैसे किसी पेशे का कुशल व्यक्ति है, तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का इस्तेमाल ऐसा काम देने में कर सकती है जिससे जरूरतमंद या वंचित समुदाय को लाभ मिले। सामुदायिक सेवा तय करते समय अपराध की गंभीरता, अपराधी की शारीरिक क्षमता, उम्र, शैक्षणिक योग्यता, कौशल, शारीरिक स्थिति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति देखी जाएगी।
काम अनुपातिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए और किसी अधिकारी के निजी काम के लिए नहीं कराया जा सकता। सेवा का आदेश नहीं मानने पर पहले चेतावनी या सेवा की अवधि बढ़ाई जा सकती है। सेवा का स्थान या काम भी बदला जा सकता है। गंभीर या लगातार अनुपालन न होने पर अदालत सामुदायिक सेवा के बचे हिस्से को आदेश में निर्धारित कारावास की सजा से बदल सकती है।
संस्थान/स्थान -- सामुदायिक सेवा में कराया जा सकने वाला काम।
अस्पताल/स्वास्थ्य संस्थान - सफाई और रखरखाव जैसे सेवा कार्य।
नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत - सफाई, अनुरक्षण और सार्वजनिक स्थलों की देखभाल, सड़क किनारे खरपतवार हटाना और सफाई।
सरकारी/सार्वजनिक भवन, सार्वजनिक पार्क, वृद्धाश्रम, छात्रावास मानसिक स्वास्थ्य संस्थान - सफाई और रखरखाव।
पुलिस थाना परिसर - सफाई, यातायात नियंत्रण और भीड़ नियंत्रण में सहयोग।
वन विभाग -पौधारोपण, पौधों में पानी देना, खरपतवार हटाना और देखभाल।
चिड़ियाघर/संग्रहालय - सफाई, रखरखाव या लिपिकीय सहायता।
अनाथालय, पशु आश्रय गृह- सेवा कार्य।
अन्य सरकारी/सामुदायिक संस्थान- कोर्ट के आदेश अनुसार उपयुक्त सामुदायिक सेवा।
या गयहै।
इसके तहत दोषी व्यक्ति को अस्पताल में सफाई करने, पौधारोपण करने या समाज के हित में इसी तरह का काम करने की सजा मिल सकती है। देशभर में एक जुलाई, 2024 से प्रभावी किए गए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में इसका प्रविधान किया गया है। प्रदेश में लंबे विचार-विमर्श और हाई कोर्ट के स्तर पर परीक्षण के बाद इसे लागू कर दिया गया है। गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
सामुदायिक सेवा का उद्देश्य दंड के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराना है। मानहानि, नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार, पहली बार चोरी जिसमें संपत्ति का मूल्य पांच हजार रुपये से कम हो, आत्महत्या का प्रयास और लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा जैसे अपराधों में सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
सेवा की अवधि एक से 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक की हो सकती है। निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका रखी गई है।
अधिसूचना में कहा गया है कि सामुदायिक सेवा की सजा पाने वाला व्यक्ति यदि डाक्टर, इंजीनियर, लेखापाल या अधिवक्ता जैसे किसी पेशे का कुशल व्यक्ति है, तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का इस्तेमाल ऐसा काम देने में कर सकती है जिससे जरूरतमंद या वंचित समुदाय को लाभ मिले। सामुदायिक सेवा तय करते समय अपराध की गंभीरता, अपराधी की शारीरिक क्षमता, उम्र, शैक्षणिक योग्यता, कौशल, शारीरिक स्थिति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति देखी जाएगी।
काम अनुपातिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए और किसी अधिकारी के निजी काम के लिए नहीं कराया जा सकता। सेवा का आदेश नहीं मानने पर पहले चेतावनी या सेवा की अवधि बढ़ाई जा सकती है। सेवा का स्थान या काम भी बदला जा सकता है। गंभीर या लगातार अनुपालन न होने पर अदालत सामुदायिक सेवा के बचे हिस्से को आदेश में निर्धारित कारावास की सजा से बदल सकती है।
संस्थान/स्थान -- सामुदायिक सेवा में कराया जा सकने वाला काम।
अस्पताल/स्वास्थ्य संस्थान - सफाई और रखरखाव जैसे सेवा कार्य।
नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत - सफाई, अनुरक्षण और सार्वजनिक स्थलों की देखभाल, सड़क किनारे खरपतवार हटाना और सफाई।
सरकारी/सार्वजनिक भवन, सार्वजनिक पार्क, वृद्धाश्रम, छात्रावास मानसिक स्वास्थ्य संस्थान - सफाई और रखरखाव।
पुलिस थाना परिसर - सफाई, यातायात नियंत्रण और भीड़ नियंत्रण में सहयोग।
वन विभाग -पौधारोपण, पौधों में पानी देना, खरपतवार हटाना और देखभाल।
चिड़ियाघर/संग्रहालय - सफाई, रखरखाव या लिपिकीय सहायता।
अनाथालय, पशु आश्रय गृह- सेवा कार्य।
अन्य सरकारी/सामुदायिक संस्थान- कोर्ट के आदेश अनुसार उपयुक्त सामुदायिक सेवा।