भोपाल। देशभर में ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर वाहन मालिकों, चालकों और आम उपभोक्ताओं के बीच लगातार बढ़ रही आशंकाओं के बीच आज राजधानी भोपाल में एक बड़ा मंच सजने जा रहा है। ‘स्टेट टाउन हॉल अगेंस्ट ई-20’ नाम से आयोजित इस राज्य स्तरीय जनसंवाद कार्यक्रम में ई-20 इंधन से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों और जन-चिंताओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
यह महत्वपूर्ण आयोजन आज, 14 अगस्त को शाम 4 बजे तुलसी नगर स्थित नर्मदीय भवन में होगा। आयोजकों ने बताया कि इस टाउन हॉल का मुख्य उद्देश्य ई-20 पेट्रोल के प्रभाव, वाहनों पर इसके असर और उपभोक्ताओं के वित्तीय बोझ जैसे सवालों पर एक खुला और सार्वजनिक मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद संजय सिंह तथा आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के प्रभारी व दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर मुख्य रूप से शामिल होंगे। वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में आयोजित इस जनसंवाद में ई-20 पेट्रोल की अनिवार्यता और उससे जुड़ी जनभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। आयोजकों का मानना है कि ईंधन से जुड़ा यह विषय सीधे तौर पर हर आम नागरिक की जेब और रोज़मर्रा की जिंदगी से प्रभावित है। ऐसे में जनहित के इस मुद्दे पर आम जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। टाउन हॉल के जरिए भोपाल सहित प्रदेश भर के वाहन चालकों को अपनी बात और शिकायतें खुलकर रखने का मौका मिलेगा।
रांची में छात्रों पर बर्बरता पर मौन क्यों हैं राहुल गांधी: हेमंत खंडेलवाल
राहुल को छात्रों के हित से नहीं, अपने राजनीतिक स्वार्थ से मतलब
भोपाल। झारखंड में कांग्रेस समर्थित जेएमएम सरकार द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता हेमंत खंडेलवाल ने राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित मीडिया चर्चा के दौरान कहा कि हाल ही में रांची में छात्र-छात्राओं के साथ हुआ बर्बर व्यवहार चिंताजनक है।
खंडेलवाल ने सवाल उठाया कि दिल्ली में छात्रों के मुद्दों पर राजनीति करने और बयानबाजी करने वाले राहुल गांधी रांची की घटना पर आखिर मौन क्यों साधे हुए हैं? उन्होंने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस चुप्पी से यह साफ हो गया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को छात्रों के वास्तविक हितों और भविष्य से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि वे सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं। संसद में जारी गतिरोध पर बात करते हुए हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने सदन में पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी, जिस पर केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी सदन में विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तत्पर हैं। इसके बावजूद विपक्ष लगातार हंगामा करके सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और विपक्ष को यह तय करना होगा कि उन्हें छात्रों के विषय पर गंभीरता से चर्चा करनी है या केवल हंगामा करके अपनी राजनीति चमकानी है। अगर राहुल गांधी में साहस है, तो वे सदन में आकर गृह मंत्री का जवाब सुनें और देश को बताएं कि वे चर्चा से क्यों भाग रहे हैं।
छात्रों से चर्चा के बाद छात्रसंघ चुनाव प्रणाली पर फैसला
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव होना है, चुनाव की प्रणाली तय होना शेष है। सरकार इस संबंध में जल्द छात्र संगठनों से चर्चा करेगी। छात्र संगठनों से चर्चा कर चुनाव की प्रणाली पर फैसला लिया जाएगा। आपको बता दें कि प्रदेश में आखिरी बार चुनाव 2017 में हुए थे। हाईकोर्ट ने सितंबर में चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी और एनएसयूआई ने चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की मांग की है।
कार्यकर्ताओं पर दर्ज लाखों मामलों के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस
राज्यसभा नामांकन निरस्त करने के मामले में चुनाव अधिकारी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे कोर्ट
भोपाल। प्रदेश में राजनीतिक विद्वेष के चलते दर्ज किए गए फर्जी मुकदमों और जनहित के मुद्दों को लेकर कांग्रेस अब भाजपा की सरकार के खिलाफ व्यापक जन-आंदोलन छेड़ेगी। पार्टी का दावा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकाल में छोटी-छोटी धाराओं के तहत करीब 62 लाख केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें से बहुतायत मामले सरकार के राजनीतिक दबाव में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर थोपे गए हैं।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित आज मंगलवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की पांच घंटे चली मैराथन बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने बताया कि पीएसी की बैठक में संगठन सृजन अभियान के साथ-साथ युवाओं, किसानों, महिलाओं और ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा पर रणनीति तैयार की गई। उन्होंने खाद संकट, उज्जैन में कथित भ्रष्टाचार, राम मंदिर चढ़ावे के विवाद और छात्र संघ चुनावों को लेकर सरकार को घेरा। चौधरी ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। जीतू पटवारी के खिलाफ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की सोची-समझी कोशिश है।
राज्यसभा चुनाव मामले में कोर्ट जाने की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित मध्य प्रदेश का विकल्प बनना चाहती है। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त किए जाने के मामले पर पटवारी ने घोषणा की कि पार्टी इस सप्ताह विधानसभा सचिव एवं चुनाव अधिकारी अरविंद शर्मा के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने राजनीतिक दबाव में अपने पद का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़ किया है।
प्रत्यक्ष प्रणाली से हों छात्र संघ चुनाव
बैठक में नेताओं ने एक स्वर में मांग की कि प्रदेश में छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने चाहिए। पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अप्रत्यक्ष चुनाव कराने की कोशिश की, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगी।
दतिया जीत से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह
दतिया उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी घनश्याम सिंह की जीत पर दतिया की जनता का आभार व्यक्त करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि इस परिणाम ने राज्य में बदलाव का स्पष्ट संदेश दे दिया है। इस जीत से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह है, जिसका सीधा लाभ आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में मिलेगा। सिंघार ने परीक्षा घोटालों, पेपर लीक, फर्जी नियुक्तियों, और ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अपने हर कार्यकर्ता और प्रताड़ित वर्ग के साथ मजबूती से खड़ी है।
नियमित शिक्षकों के लिए ऑनलाइन हाजिरी के नियम सख्त, अतिथि शिक्षकों को राहत
नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में फंसे मानदेय और री-ज्वाइनिंग की समस्या दूर करने में जुटा डीपीआई
भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में अनुशासन लाने और तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। एक ओर जहां नियमित शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षकों के लिए री-ज्वाइनिंग और रुके हुए मानदेय के भुगतान का रास्ता साफ करने की पहल की है।
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए रुख कड़ा कर लिया है। नए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज कराने की समय-सीमा में कटौती की जा रही है। पहले जहां शिक्षकों को सुबह 9.30 बजे से 10.45 बजे तक ऑनलाइन हाजिरी लगाने की छूट थी, वहीं अब इस समय को घटाकर सुबह 10.00 बजे तक करने की तैयारी है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल सुधारना और शिक्षकों की समय पर मौजूदगी सुनिश्चित करना है।
नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के अतिथि शिक्षकों को मिलेगी राहत
विभाग ने प्रदेश के दूरदराज और नेटवर्क विहीन इलाकों में तैनात अतिथि शिक्षकों की समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाई है। कई ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी न होने के कारण अतिथि शिक्षक अपनी री-ज्वाइनिंग दर्ज नहीं करा पा रहे थे, जिससे उनका मानदेय भी अटक गया था। डीपीआई ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। विभाग ने ऐसे सभी नेटवर्क विहीन स्कूलों, वहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों और उनके लंबित मानदेय का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
जल्द होगा लंबित मानदेय का समाधान
जिलेवार जानकारी मिलते ही विभाग तकनीकी बाधाओं को दूर कर अटेंडेंस की नई वैकल्पिक व्यवस्था बनाएगा। मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 70 हजार अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डीपीआई के इस कदम से कनेक्टिविटी न होने की वजह से परेशान चल रहे हजारों अतिथि शिक्षकों को अपना बकाया मानदेय मिलने और प्रक्रिया सुचारू होने की उम्मीद जगी है।
नए जिलों में शुरू करें रेशम की खेती, मंत्री ने दिए निर्देश
भोपाल। कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने मंत्रालय में रेशम संचालनालय की समीक्षा बैठक के दौरान बजट का पूरा उपयोग न हो पाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभाग के लिए आवंटित बजट का शत-प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री जायसवाल ने प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में फिलहाल रेशम की खेती नहीं हो रही है, वहां 50-50 किसानों को चिह्नित कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रेशम पालन की शुरुआत कराई जाए। प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ने और उन्हें प्रेरित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। संचालनालय में कर्मचारियों की पदोन्नति की स्थिति की जानकारी लेते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।
सब्सिडी के सहारे बढ़े कदम, दो-पहिया वाहनों ने मारी बाजी
ई-व्हीकल्स में इंदौर अव्वल, जबलपुर दूसरे और भोपाल चौथे स्थान पर
भोपाल। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन (ग्रीन मोबिलिटी) की ओर आम जनता के कदम अब तेजी से आगे बढ़ने लगे हैं। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी और प्रोत्साहनों के बूते सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में उछाल देखा जा रहा है। पिछले एक साल (वित्त वर्ष 2025-26) में प्रदेश में कुल 88,209 पंजीकृत ई-वाहनों को सरकारी सब्सिडी का सीधा लाभ मिला है। इस ई-क्रांति में सबसे बड़ी बाजी दो-पहिया वाहनों ने मारी है, जिनका कुल बिक्री और पंजीकरण में 92 प्रतिशत से अधिक का दबदबा रहा।
महानगरों की बात करें तो व्यावसायिक राजधानी इंदौर 12,840 वाहनों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि संस्कारधानी जबलपुर दूसरे और राजधानी भोपाल चौथे स्थान पर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ग्राहकों को आकर्षित करने में फेम इंडिया स्कीम (द्वितीय चरण) का अहम योगदान रहा है। सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक पांच वर्षों में 11,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया, जिसके तहत देशभर में 16.72 लाख ई-दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में सहायता दी गई। इसी योजना के बल पर मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 81,840 ई-दोपहिया और 6,369 ई-तिपहिया वाहनों को सब्सिडी प्रदान की गई। दैनिक आवाजाही के लिए पेट्रोल के विकल्प के रूप में ई-स्कूटर और ई-बाइक लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।
महानगरों का रहा दबदबा
प्रदेश के बड़े शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और जागरूकता के चलते ई-वाहनों की खपत सबसे ज्यादा देखी गई है। इंदौर (नंबर-1) में कुल 12,840 ई-वाहन (11,347 दो-पहिया और 1,493 तीन-पहिया) के साथ इंदौर पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है। ग्वालियर (नंबर-2) में कुल 9,476 ई-वाहन (8,987 दो-पहिया और 489 तीन-पहिया) के साथ ग्वालियर दूसरे स्थान पर है। जबलपुर (नंबर-3) तके कुल 7,913 ई-वाहन (6,905 दो-पहिया और 1,008 तीन-पहिया) पंजीकृत कर जबलपुर दूसरे स्थान पर रहा। वहीं राजधानी राजधानी भोपाल में कुल 6,622 ई-वाहन (6,509 दो-पहिया और 113 तीन-पहिया) सड़कों पर उतरे, जिससे यह चौथे स्थान पर खिसक गई।
छिंदवाड़ा और कटनी में भी बढ़ा रुझान
बड़े शहरों के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी ई-वाहनों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। छिंदवाड़ा में 2,606 दो-पहिया और 77 तिपहिया वाहनों के साथ कुल 2,683 ई-वाहन दर्ज हुए। कटनी में 757 दो-पहिया और 567 तिपहिया वाहनों के साथ कुल 1,324 ई-वाहन, बैतूल में कुल 1,043 ई-वाहन (1,023 दो-पहिया, 20 तिपहिया), सिवनी में कुल 1,039 ई-वाहन (1,020 दो-पहिया, 19 तिपहिया), बालाघाट में कुल 785 ई-वाहन (772 दो-पहिया, 13 तिपहिया), मंडला जिले में कुल 304 ई-वाहन (280 दो-पहिया, 24 तिपहिया) और पांढुर्णा नवगठित जिले में 12 ई-दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए, जबकि यहां अभी तक एक भी सब्सिडी प्राप्त ई-तिपहिया वाहन का खाता नहीं खुला है।