'समुद्र मंथन' से अब देश को क्या मिलेगा, सरकार की नजर किस 'अमृत' पर, कितने हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे?

Curated by: वरुण शैलेश|नवभारतटाइम्स.कॉम1 Aug 2026, 10:31 pm IST

Samudra Manthan: सरकार को उम्मीद है कि समुद्र मंथन की पहल से समय के साथ तेल और गैस के भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा तेल के बराबर की बढ़ोतरी होगी।

Offshore oil platform

समुद्र मंथन।

नई दिल्लीः अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और होर्मुज जैसे संकट से निपटने के लिए भारत समुद्र में तेल खोजने की दिशा में काम करना शुरू किया है। भारत ने महत्वाकांक्षी समुद्र खनन कार्यक्रम शुरू किया है जिसे समुद्र मंथन नाम दिया गया है। इसका मकसद समुद्र से तेल, नेचरूल गैस निकालना है।

नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मिली मंजूरी

इंडिया टुडे ने नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम की जानकारी रखने वाले अधिकारी के हवाले से बताया, इस स्कीम को मंजूरी मिल चुकी है, जिस पर वित्त वर्ष 20230-31 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
समुद्र मंथन का मकसद गहरे समुद्र वाले इलाकों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। माना जाता है कि इन इलाकों में भारी संसाधन मौजूद हैं, लेकिन अभी तक इनकी खोज नहीं हो पाई है। 'समुद्र मंथन' नाम प्राचीन हिंदू पौराणिक कथा से प्रेरित है, जिसमें समुद्र को मथने की कहानी है; यह छिपे हुए खजाने की खोज का प्रतीक है।

नए दौर का समुद्र मंथन

सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा है। इसका जिक्र उन्होंने सबसे पहले 2025 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में किया था। इस विजन का मकसद समुद्र में मौजूद ऊर्जा क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए आधुनिक दौर का 'समुद्र मंथन' करना है।विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी
  • यह कार्यक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण देश विदेशी सप्लाई पर निर्भर है।
  • इस स्कीम के तहत, सरकार शुरुआती दौर के अहम कामों के लिए फंड देगी, जैसे कि बड़े पैमाने पर सिस्मिक सर्वे, जियोलॉजिकल स्टडी, खोज के लिए ड्रिलिंग और समुद्र में साझा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
  • इसका मकसद अच्छी क्वालिटी का जियोलॉजिकल डेटा तैयार करना है, जिससे अच्छे हाइड्रोकार्बन रिसोर्स की पहचान हो सके और समुद्र में खोज के काम में ज्यादा इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिले।
  • इस कार्यक्रम से ऑयल और गैस वैल्यू चेन में इन्वेस्टमेंट आने की भी उम्मीद है, साथ ही इससे भारत का ऑफशोर एनर्जी इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।
  • इस योजना के तह्त समुद्र में अच्छे ब्लॉक में खोज के लिए ड्रिलिंग शुरू करने से पहले, एडवांस्ड सिस्मिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके समुद्र में मौजूद तलछटी बेसिन का व्यवस्थित रूप से नक्शा तैयार करेगी।
  • इसमें फ्रंटियर बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, समुद्र में उत्पादन और निकासी के लिए साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, एक इंटीग्रेटेड ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस ज़ोन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल है।
  • सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस के भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा तेल के बराबर की बढ़ोतरी होगी।
  • हालांकि कमर्शियल उत्पादन शुरू होने में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोज से ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता कम हो सकती है।
  • इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आ सकता है, नौकरियां पैदा हो सकती हैं और देश की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता बढ़ सकती है।

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