निरस्त संगठन के नेताओं को जगह देने का आरोप
भोपाल। मध्यप्रदेश में पेंशनर्स कल्याण मंडल का पुनर्गठन होते ही विवादों के घेरे में आ गया है। मध्यप्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस पुनर्गठन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का दावा है कि वित्त विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना में ऐसे संगठन के लोगों को उपकृत किया गया है, जिसका वजूद ही खत्म हो चुका है। इस फैसले से प्रदेश भर के वास्तविक और सक्रिय पेंशनर संगठनों में भारी आक्रोश है।
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मामले को लेकर बताया कि वित्त विभाग ने पुनर्गठन अधिसूचना में एक ऐसे संगठन से जुड़े पांच लोगों को शामिल किया है, जिसका शासकीय पंजीयन साल 2023 में ही निरस्त किया जा चुका है। सक्सेना ने आरोप लगाया कि इन पांच लोगों के अलावा दो अन्य ऐसे सदस्यों को भी मंडल में जगह दी गई है, जो किसी भी पंजीकृत पेंशनर संगठन के पदाधिकारी तक नहीं हैं। बिना जनाधार और बिना पात्रता वाले लोगों को शामिल करने से मंडल के गठन के मूल उद्देश्य पर ही गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
एसीएस को लिखा पत्र
इस विसंगति को लेकर प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) को एक पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि पुनर्गठन के इस विवादित आदेश में तत्काल संशोधन किया जाए, प्रदेश स्तर पर वास्तव में सक्रिय और पंजीकृत पेंशनर संगठनों के असली प्रतिनिधियों को मंडल में उचित स्थान दिया जाए और इस संशोधन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही मंडल की आगामी बैठक बुलाई जाए।
सक्रिय संगठनों की अनदेखी से उपजा आक्रोश
पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष शैलेंद्र श्रीवास्तव ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मंडल के गठन में प्रदेश के जमीनी और एक्टिव संगठनों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पेंशनरों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान और उनके सुझावों पर प्रभावी चर्चा तभी संभव है, जब मंडल में प्रांतीय स्तर पर सक्रिय और पंजीकृत संगठनों के वास्तविक पदाधिकारियों को शामिल किया जाए।