पिघल रहीं सड़कें, टेढ़ी हुईं ट्राम की पटरियां, हीटवेव से दहक उठा यूरोप... भीषण गर्मी से मचा हाहाकार

जलवायु परिवर्तन का असर अब विकसित देशों के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी पड़ने लगा है। इस समय पूरा यूरोप भीषण और जानलेवा 'हीटवेव' (गर्मी की लहर) की च...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR Publish Date: Mon, 29 Jun 2026 04:06:51 PM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jun 2026 04:20:21 PM
पिघल रहीं सड़कें, टेढ़ी हुईं ट्राम की पटरियां, हीटवेव से दहक उठा यूरोप... भीषण गर्मी से मचा हाहाकार

हीटवेव से दहक उठा यूरोप

HighLights

  1. यूरोप में भीषण गर्मी का प्रकोप, 40 डिग्री के पार पहुंचा पारा
  2. गर्मी से पिघल रही हैं कंक्रीट की सड़कें और टेढ़ी हुईं रेल पटरियां
  3. फ्रांस के अस्पतालों में बढ़ा दबाव, इटली के 18 शहरों में रेड अलर्ट

डिजिटल डेस्क। जलवायु परिवर्तन का असर अब विकसित देशों के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी पड़ने लगा है। इस समय पूरा यूरोप भीषण और जानलेवा 'हीटवेव' (गर्मी की लहर) की चपेट में है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि रिकॉर्ड-तोड़ तापमान के कारण कंक्रीट की सड़कें पिघल रही हैं, ट्राम व ट्रेनों की लोहे की पटरियां टेढ़ी-मेढ़ी हो रही हैं और पूरा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है।

फ्रांस और जर्मनी से लेकर ब्रिटेन तक तापमान का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, जिसने सदियों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

टूट गए सदियों पुराने रिकॉर्ड, उबल रहे हैं देश

इस हफ्ते पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई यह भीषण गर्मी अब मध्य और पूर्वी यूरोप तक फैल गई है। डेनमार्क में साल 1874 (जब से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ) के बाद से अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

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इसके अलावा, स्विट्जरलैंड के बासेल में पारा 38.8 डिग्री और चेक गणराज्य में रिकॉर्ड 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, ब्रिटेन में जून के महीने ने साल 1976 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 37.3 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा छू लिया।

दरक रहे हैं हाईवे, न्यूक्लियर पावर प्लांट हुए धीमे

जर्मनी के बर्लिन के बाहर 'ए2 मोटरवे' पर भीषण गर्मी के कारण कंक्रीट के स्लैब अचानक फट गए, जिससे हाईवे का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। रेल ऑपरेटर 'ड्यूश बान' ने पटरियों के फैलने के खतरे को देखते हुए यात्रियों को गैर-जरूरी यात्रा न करने की चेतावनी दी है।

फ्रांस में गर्मी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। सरकारी बिजली कंपनी 'ईडीएफ' को अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट की कूलिंग प्रोसेस प्रभावित होने के कारण बिजली उत्पादन कम करना पड़ा है।

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अस्पतालों में इमरजेंसी, नर्सिंग होम खाली कराए गए

इस जानलेवा मौसम ने यूरोप के हेल्थकेयर सिस्टम को घुटनों पर ला दिया है...

  • नर्सिंग होम खाली: जर्मनी के डॉरमाजेन में एक नर्सिंग होम के भीतर तापमान 35 डिग्री पहुंचने के बाद वहां से बुजुर्गों को रेस्क्यू करना पड़ा।
  • अस्पतालों में रेड अलर्ट: पेरिस के अस्पतालों में सामान्य से एक-तिहाई ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं, जिससे निपटने के लिए सभी 38 सरकारी अस्पतालों में 'इमरजेंसी प्लान' लागू कर दिया गया है।
  • इवेंट्स रद्द: अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए पेरिस प्राइड मार्च को टालना पड़ा और एक तीन दिवसीय म्यूजिक फेस्टिवल को रद्द कर दिया गया।

इटली से ब्रिटेन तक हाई अलर्ट

इटली ने रोम, वेनिस और मिलान सहित 18 शहरों में 'रेड हीट अलर्ट' जारी किया है। वहीं, यूके में 'एम्बर हीट वॉर्निंग' लागू है, जहां गर्मी से राहत पाने के लिए असुरक्षित झीलों और नदियों में तैरने के चक्कर में अब तक 4 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।


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