राज्यसभा सीटों के लिए दिल्ली में तेज हुई बैठकें, दोनों खेमों में रणनीतिक हलचल
भोपाल। प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही सियासी बिसात बिछ चुकी है। सूबे की तीन राज्यसभा सीटों के लिए देश की राजधानी दिल्ली में सियासी पारा चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के बड़े नेताओं का दिल्ली में डेरा डला हुआ है और उम्मीदवारों के चयन को लेकर मैराथन बैठकों का दौर जारी है। इस बार जहां कांग्रेस के सामने अपनी एकमात्र सुरक्षित सीट को बचाए रखने और अंतर्कलह से निपटने की चुनौती है, वहीं भाजपा बाकी दो सीटों पर सोशल इंजीनियरिंग के तहत नया दांव खेलने की तैयारी में है।
कांग्रेस खेमे में इस समय सबसे बड़ी चिंता विधायकों के बीच मची अंदरूनी खींचतान को शांत करने और संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे को टालने की है। इसी सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी दिल्ली में मौजूद हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बंद कमरे में लंबी चर्चा भी की है। सूत्रों का दावा है कि विधायकों पर मजबूत पकड़ रखने वाले कमलनाथ को ही पार्टी उम्मीदवार बनाकर संसद भेज सकती है, ताकि भाजपा के लिए सेंधमारी का कोई मौका न बचे। हालांकि, कमलनाथ ने खुद चुनाव लड़ने को लेकर गेंद केंद्रीय नेतृत्व के पाले में डाल दी है। इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आलाकमान से अलग-अलग मुलाकात कर चुके हैं। दोनों नेताओं का भी यही मानना है कि संगठन और विधायकों को एकजुट रखने के लिए किसी ऐसे हैवीवेट चेहरे को मैदान में उतारा जाए जिस पर सभी की सहमति हो।
सवर्ण वर्ग को साधने पर भाजपा का फोकस
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भाजपा में भी बैठकों का दौर बेहद तेज है। पार्टी की ओर से खंडेलवाल ने हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर राज्य के संभावित दावेदारों के नामों की सूची सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार राज्यसभा चुनाव के जरिए अपने कोर वोटर यानी सवर्ण वर्ग को बड़ा संदेश देने की तैयारी में है। सवर्ण वर्ग के प्रमुख चेहरों को आगे कर पार्टी आगामी राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करना चाहती है। हमेशा की तरह इस बार भी माना जा रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व किसी नए और अप्रत्याशित चेहरे को मौका देकर सबको चौंका सकता है।
दिल्ली पर टिकी हैं निगाहें
नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है। ऐसे में अब दोनों ही दलों के पास समय बेहद कम है। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपनी एकता की तलाश में कमलनाथ के नाम पर मुहर लगाती है या कोई नया फॉर्मूला अपनाती है, और भाजपा सवर्ण कार्ड के जरिए किसे संसद के उच्च सदन का टिकट सौंपती है। दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं की नजरें अब दिल्ली आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।