कान्हा नेशनल पार्क में टाइगर संकट, एक महीने में 8 बाघों की मौत

आपसी संघर्ष में मौत की आशंका, पार्क प्रबंधन में मचा हड़कंप
भोपाल। प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बेहद विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। बाघों के गढ़ कहे जाने वाले इस नेशनल पार्क में राष्ट्रीय पशु की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
 खापा रेंज के जंगलों में आज मंगलवार की सुबह गश्ती दल को एक और बाघ का शव मिला है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और पार्क प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस बाघ की जान भी आपसी वर्चस्व की लड़ाई (क्षेत्रीय संघर्ष) के कारण गई है। हालांकि, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। कान्हा नेशनल पार्क में बीते केवल एक महीने के भीतर 8 बाघों की मौत हो चुकी है, जिसमें एक बाघिन और उसके चार मासूम शावक भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लगातार हो रही मौतों ने पार्क की सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके पहले 21 अप्रैल को अमाही नाला के पास एक 16 महीने के नर शावक का शव मिला। पोस्टमार्टम में शावक का पेट पूरी तरह खाली पाया गया, जिससे आशंका है कि उसकी मौत भूख के कारण हुई। 23 अप्रैल को दो अलग-अलग मामले सामने आए। पहला, एक और नर शावक की रहस्यमयी मौत हुई, जिसका कारण डॉग स्क्वॉड और हाथियों की मदद से सर्चिंग के बाद भी स्पष्ट नहीं हो सका। दूसरा, इसी दिन जत्ता बीट में भी एक नर बाघ का शव बरामद हुआ। 29 अप्रैलरू को मुक्की रेंज में एक 10 साल की मादा बाघ (बाघिन) और उसके डेढ़ साल के नर शावक की मौत हो गई। 4 मई को  किसली जोन के प्रसिद्ध बाघ डिगडोला का शव मगरनाला में मिला। वन विभाग के मुताबिक, डिगडोला की मौत भी आपसी संघर्ष के दौरान हुई थी।
वर्चस्व की जंग और भूख बन रही है बाघों का काल
देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले कान्हा नेशनल पार्क में इन दिनों बाघों के बीच अस्तित्व की खूनी जंग छिड़ी हुई है। विशेषज्ञों और वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इन मौतों के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं।  इनमें क्षेत्रीय वर्चस्व अपनी टेरिटरी (इलाके) पर कब्जा बनाए रखने या दूसरे के इलाके में घुसपैठ को लेकर बाघ अक्सर आपस में भिड़ रहे हैं,  भूख और शिकार की कमी शावकों के खाली पेट मिलने से यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि जंगलों में शिकार की कमी या कमजोर शावकों तक भोजन न पहुंच पाना उनकी मौत की वजह बन रहा है। इसके अलावा मादा बाघ के लिए संघर्ष मेटिंग सीजन या मादा बाघ पर अधिकार जमाने के लिए भी दो ताकतवर नर बाघों के बीच जानलेवा लड़ाई आम बात हो चुकी है।

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