दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश में भी वर्क फ्रॉम होम की मांग

 कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को भेजा प्रस्ताव
भोपाल।राजधानी दिल्ली में प्रदूषण और यातायात प्रबंधन के लिए लागू किए गए वर्क फ्रॉम होम और मेट्रो मंडे के सफल प्रयोग के बाद अब मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। प्रदेश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर सरकारी और निजी क्षेत्रों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति मांगी है। बढ़ती गर्मी, खस्ताहाल सड़कों और ईंधन के बढ़ते दामों को इस मांग का मुख्य आधार बनाया गया है।
अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संयोजक एसबी सिंह ने सरकार को लिखे पत्र में तर्क दिया है कि वर्तमान वैश्विक और स्थानीय परिस्थितियों में कार्यप्रणाली में बदलाव अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि न केवल सरकारी कार्यालयों, बल्कि निजी संस्थानों में भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की भी वकालत की गई है, जिससे ईंधन की खपत को नियंत्रित किया जा सके।  कर्मचारी नेता प्रमोद तिवारी के अनुसार, शहरों में बढ़ता ट्रैफिक और सड़कों की बदहाली कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा यदि सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की सुविधा मिलती है, तो कर्मचारियों को मानसिक तनाव से बड़ी राहत मिलेगी। इससे न केवल उनके समय की बचत होगी, बल्कि उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।
सरकारी खजाने और पर्यावरण को होगा दोहरा लाभ
संगठनों ने अपने प्रस्ताव में इस मांग के दूरगामी फायदे भी बताएं हैं। जिसके तहत कहा है कि कार्यालयों के बंद रहने से बिजली और संसाधनों की खपत में भारी कमी आएगी,  सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी ईंधन संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की बचत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए हितकारी होगी।
 


Leave Comments

Top