प्रशासनिक तालमेल के लिए 18 विभागों के एसीएस और प्रमुख सचिव भी रहेंगे मौजूद
भोपाल। प्रदेश सरकार ने निगम, मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में हाल ही में नियुक्त किए गए पांच दर्जन से अधिक नेताओं को शासन की बारीकियां समझाने और कार्यप्रणाली में दक्ष करने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार इन नवनियुक्त अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है, ताकि वे अपनी नई भूमिकाओं में जनहित के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल कर सकें।
मंत्री का दर्जा प्राप्त इन नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए 18 मई सोमवार को राजधानी स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में इस प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया है। सुबह 9 बजे स्वयं मुख्यमंत्री इस सत्र का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे तक चलेगा। मुख्यमंत्री इन नेताओं को सुशासन, पारदर्शिता और जनहित की दिशा में कार्य करने का मूल मंत्र देंगे। प्रशिक्षण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में 18 विभागों के अपर मुख्य सचिव , प्रमुख सचिव और सचिव’’ स्तर के अधिकारी शामिल होंगे, जो सरकार की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की तकनीकी जानकारी साझा करेंगे।
इन मुख्य विषयों पर केंद्रित रहेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान नवनियुक्त पदाधिकारियों को निगम-मंडलों की कार्यप्रणाली और सरकारी नीतियों का जमीनी क्रियान्वयन, सरकारी धन का सदुपयोग, बजट आवंटन और वित्तीय अनुशासन का पालन, दर्जा प्राप्त मंत्रियों के रूप में मिलने वाले कानूनी अधिकार और उनकी जिम्मेदारियां की जानकारी दी जाएगी।
पारदर्शिता और परिणामों पर जोर
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी 63 पदाधिकारियों की इस प्रशिक्षण में उपस्थिति अनिवार्य की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की इस पहल को निगम-मंडलों के कामकाज को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि ये नेता बिना किसी प्रशासनिक देरी के अपनी नई भूमिकाओं में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना शुरू कर दें।