मतगणना से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC: विशेष पीठ कल करेगी सुनवाई, पर्यवेक्षकों की तैनाती से जुड़ा है मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 01 May 2026 07:54 PM IST

TMC In Supreme Court: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मतों की गणना से पहले सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बीते दिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पार्टी ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती पर आपत्ति जताई थी। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष समिति का गठन किया है जो दो मई को मामले की सुनवाई करेगी।

AITC has approached the Supreme Court against Calcutta High Court’s order yesterday rejecting its plea
 
सुप्रीम कोर्ट और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। - फोटो : पीटीआई/आईएएनएस

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। यह कदम कोलकाता उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ उठाया गया है। उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया था। यह याचिका पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से संबंधित थी। तृणमूल कांग्रेस ने मतगणना में पर्यवेक्षकों की तैनाती पर आपत्ति जताई थी। पार्टी ने केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पर्यवेक्षक बनाने के फैसले को चुनौती दी थी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारी भी शामिल थे। अब सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ 2 मई को इस मामले की सुनवाई करने वाली है।
टीएमसी ने तत्काल सुनवाई का किया था आग्रह
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ कल सुबह 10:30 बजे याचिका पर सुनवाई करेगी। अपनी याचिका में टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट से कल इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने का आग्रह किया, जिसमें कहा गया है कि चुनाव वाले राज्य में मतगणना सोमवार सुबह से शुरू होने वाली है, और याचिका की सुनवाई में किसी भी प्रकार की देरी इसे निष्फल बना देगी।
निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है यह फैसला- टीएमसी
तृणमूल कांग्रेस का मानना था कि यह फैसला निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अपनी याचिका में इस पर गंभीर सवाल उठाए थे। पार्टी ने तर्क दिया था कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। अब तृणमूल कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाने का निर्णय लिया है।
क्या है TMC की याचिका का आधार?
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि केवल केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती अनुचित है। उनका कहना था कि इससे मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो सकता है। पार्टी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी पर्यवेक्षक के रूप में शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग के इस विशेष फैसले को चुनौती दी थी।
सर्वोच्च न्यायालय में अपील
तृणमूल कांग्रेस ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है। पार्टी ने उम्मीद जताई है कि सर्वोच्च न्यायालय उनकी दलीलों पर गंभीरता से विचार करेगा। वे चाहते हैं कि मतगणना प्रक्रिया में सभी पक्षों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो। इस महत्वपूर्ण मामले पर अब सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।
टीएमसी ने लगाए हेराफेरी के आरोप
पश्चिम बंगाल में मतदान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वोट में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विपक्ष ने इन दावों को खारिज करते हुए राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, चुनाव आयोग के फैसलों और व्यवस्थाओं को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं।'
उन्होंने कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र में स्थित एक स्ट्रॉन्ग रूम का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। उनके अनुसार, मीडिया को मिले सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग बैलेट के साथ काम करते नजर आए, जबकि वहां उम्मीदवारों या उनके एजेंटों की मौजूदगी नहीं थी, जो कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी मांग की कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मीडिया को भी सीसीटीवी कैमरों तक सीधी पहुंच दी जानी चाहिए। कुणाल घोष ने कहा, 'केवल राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों को भी स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी प्रणाली देखने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे किसी भी तरह के संदेह को दूर करने में मदद मिलेगी और जनता का भरोसा मजबूत होगा।'
15 मतदान केंद्रों पर 2 मई को फिर मतदान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत दक्षिण 24 परगना जिले की दो विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर 2 मई को दोबारा मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को इन केंद्रों पर रद्द घोषित करते हुए पुनर्मतदान का आदेश जारी किया है। चुनाव आयोग द्वारा कुछ बूथों पर पुनर्मतदान कराने के फैसले पर भी टीएमसी ने आपत्ति जताई है। कुणाल घोष ने कहा, 'मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था और जबरन पुनर्मतदान की मांग करना उचित नहीं है। जिन बूथों पर दोबारा मतदान होगा, वहां भी टीएमसी भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी।' बता दें कि इन सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन रिपोर्ट्स के बाद दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया गया है। चार मई को सभी विधानसभा सीटों के नतीजे सामने आने वाले हैं, जिसको लेकर व्यापक तैयारियां कर ली गई हैं।

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