भोपाल। राजधानी भोपाल में स्थित जहांगीराबाद मॉडर्न स्लॉटर हाउस का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संग्राम का रूप ले चुका है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अमित शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस कर सनसनीखेज दस्तावेज पेश करते हुए नगर निगम प्रशासन और भाजपा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस मामले को केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और जन-आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
शर्मा ने नगर निगम के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें महापौर और एमआईसी सदस्यों ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया था। शर्मा ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि 24 अक्टूबर 2025 की एमआईसी बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 6 के तहत स्लॉटर हाउस के कार्य विस्तार का मुद्दा रखा गया था। दस्तावेजों पर महापौर मालती राय और अन्य एमआईसी सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। शर्मा का आरोप है कि नियमों में संशोधन कर, बिना किसी पेनल्टी के 20 वर्षों के लिए संचालन का अनुबंध दे दिया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति (असलम चमड़ा) का मामला नहीं है। कल उसे जमानत मिलना यह दर्शाता है कि पर्दे के पीछे बड़े खिलाड़ी हैं। कांग्रेस मांग करती है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराएं।
करोड़ों की पेनल्टी माफी और सांठगांठ का आरोप
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि संबंधित पक्ष पर जो करोड़ों रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी, उसे मिलीभगत कर क्यों माफ कर दिया गया? उन्होंने कहा कि असलम चमड़ा और उसके ड्राइवर की गिरफ्तारी महज एक श्आईवॉशश् है। 20 साल का लंबा अनुबंध और दंड की माफी बिना उच्च पदों पर बैठे लोगों के संरक्षण के संभव नहीं है। शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को खानापूर्ति बताते हुए कहा कि जांच के दौरान मूल दस्तावेजों को जानबूझकर दूर रखा गया।