राजधानी के जहांगीराबाद स्थित मॉडर्न स्लॉटर हाउस कांड को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अमित शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं, सनातन परंपराओं और बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अमित शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से स्लॉटर हाउस संचालन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतना बड़ा कथित अवैध संचालन केवल एक व्यक्ति के स्तर पर संभव है? या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पहले जहांगीराबाद स्थित मॉडर्न स्लॉटर हाउस को छह माह की अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन बाद में बिना पेनल्टी के इसे बदलकर 20 वर्षों के लिए संचालन और संधारण का अनुबंध कर दिया गया। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की पेनल्टी को भी माफ कर दिया गया, जिसे उन्होंने गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार करार दिया।
अमित शर्मा ने दावा किया कि जिन जनप्रतिनिधियों ने जानकारी नहीं होने की बात कही थी, उनके हस्ताक्षर संबंधित दस्तावेजों पर मौजूद हैं। इसमें महापौर सहित एमआईसी सदस्यों के नाम शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामले में पारदर्शिता नहीं रखी गई। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी जांच को भी सवालों के घेरे में रखते हुए कहा कि यह जांच केवल औपचारिकता साबित हो रही है और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
न्यायिक जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और सभी दोषी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कथित संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और इसे जनता की आवाज बनाकर कथित भ्रष्टाचार और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को बेनकाब किया जाएगा।