टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 27 सितंबर से शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना

भोपाल। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में मध्य प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने 27 सितंबर से भोपाल में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश की प्रदेश स्तरीय बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई। संगठनों ने टीईटी के आवेदन पत्र नहीं भरने का भी सामूहिक निर्णय लिया है।
मोर्चे के पदाधिकारियों के अनुसार, टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता लागू करने की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने के लिए संगठन पदाधिकारी पुलिस कमिश्नर से अनुमति लेने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, जिला और संभाग स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा भी जल्द तय की जाएगी।  बैठक में शिक्षक संगठनों ने मांग की कि राज्य सरकार तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर टीईटी नहीं कराने के संबंध में प्रस्ताव पारित करे। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजकर इस मामले में निर्णय कराने की मांग की गई।
आंदोलन के तहत शिक्षक टीईटी के आवेदन पत्र नहीं भरेंगे। मोर्चे के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा। 27 सितंबर से भोपाल में प्रस्तावित धरने में जिला और संभाग स्तर के शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना जारी की जाएगी।
 डिजिटल क्रांति से मजबूत होगा किसान आंदोलन
 प्रचार प्रमुखों को मिला मीडिया और सोशल मीडिया का प्रशिक्षण
भोपाल।  आधुनिक तकनीक और सूचना क्रांति के इस दौर में किसानों की आवाज को शासन-प्रशासन और समाज तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कमर कस ली है। भारतीय किसान संघ मध्य भारत प्रांत द्वारा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक दिवसीय जिला प्रचार प्रमुख कार्यशाला में संगठन के जिला और संभाग स्तर के मीडिया प्रभारियों को डिजिटल मीडिया, समाचार लेखन और सोशल मीडिया प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
तीन सत्रों में आयोजित इस कार्यशाला में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि बदलते दौर में तकनीक के स्मार्ट उपयोग से ही किसानों के मुद्दों को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यशाला का आयोजन मध्य भारत प्रांत के संगठन मंत्री भरत पटेल के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेंद्र पटेल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान मध्य भारत प्रांत के सभी जिलों और संभागों से आए प्रचार प्रमुखों को मीडिया संचालन की बारीकियाँ सिखाई गईं।
पहले सत्र में मध्य क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चौधरी ने संगठनात्मक अनुशासन और प्रचार तंत्र के मूलभूत दायित्वों पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। दूसरे सत्र में प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने मीडिया के प्रभावी उपयोग, प्रचार तंत्र के सुचारू संचालन और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर विस्तृत जानकारी साझा की। अंतिम सत्र में पत्रकारों से बेहतर समन्वय, समाचार लेखन और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को मोबाइल फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, और सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
बदलते सूचना तंत्र के साथ अपडेट रहें कार्यकर्ता
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रांत संगठन मंत्री भरत पटेल ने कहा कि आज सूचना तकनीक का दायरा तेजी से बदला है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का तकनीकी रूप से अपडेट रहना बेहद जरूरी है। आधुनिक माध्यमों के अधिकतम और सही उपयोग से दूर-दराज के गांवों में काम करने वाले किसान भाइयों के मुद्दों, संगठन की विचारधारा और गतिविधियों को शासन तथा व्यापक समाज तक मजबूती से पहुंचाया जा सकता है।
 पटवारियों के नाम नहीं, अब शासन के नाम होगी स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री
पटवारियों की आपत्ति के बाद सरकार का फैसला
भोपाल। स्वामित्व योजना के तहत होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। अब इन संपत्तियों की रजिस्ट्री पटवारी के नाम पर नहीं, बल्कि शासन के नाम पर की जाएगी। पटवारियों की नाराजगी के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि इस संबंध में विभाग के प्रमुख सचिव से चर्चा हो चुकी है और आगे रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 का शुभारंभ किया था। योजना के तहत प्रदेश में करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का निशुल्क पंजीयन किया जाना है। राज्य सरकार इस अभियान पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।
68.47 लाख अधिकार अभिलेख तैयार
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 41,586 गांवों में 68.47 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के दस्तावेजों का पंजीयन अभियान के तहत मुफ्त किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे ग्रामीण परिवारों को संपत्ति का वैध दस्तावेज उपलब्ध कराना है, जिनके पास मालिकाना हक तो है, लेकिन पंजीकृत दस्तावेज नहीं हैं। पंजीयन के लिए हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। संपत्ति के दस्तावेज मिलने से ग्रामीण परिवार घर निर्माण, कारोबार, खेती और अन्य आर्थिक जरूरतों के लिए ऋण लेने में सक्षम हो सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और आजीविका को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
 वेयरहाउस संचालकों से मांगी रिश्वत, विपणन अधिकारी निलंबित
भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्रालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी कार्रवाई की है। सीहोर जिले में निरीक्षण के दौरान दो वेयरहाउस संचालकों से सब्सिडी जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत पर विपणन अधिकारी अनुराग को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी विपणन अधिकारी ने भैरुंदा तहसील स्थित शिवाय वेयरहाउस से 1 लाख रुपये और रेहटी क्षेत्र के ग्राम बेहराखेड़ी स्थित श्री कृष्णा वेयरहाउस से 60 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। पीड़ितों द्वारा इस पूरे मामले की सीधी शिकायत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्री ने बिना किसी देरी के त्वरित जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए, जिसके बाद अधिकारी के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई के जरिए मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों और वेयरहाउस संचालकों से जुड़ी किसी भी सरकारी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
 मुख्यमंत्री निवास में आकार ले रहा ‘जन-मन सभागार’
भोपाल में नया स्टेट गेस्ट हाउस, जबलपुर में बनेगा नया सर्किट हाउस
भोपाल। राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास परिसर में आमजन और समाज से सीधे संवाद के लिए भव्य ‘जन-मन सभागार’ आकार ले रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश में प्रशासनिक और अतिथि सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भोपाल में एक नया अत्याधुनिक स्टेट गेस्ट हाउस तथा जबलपुर में नया सर्किट हाउस बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि जन-मन सभागार सहित राज्य के सभी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए।
मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश भवन विकास निगम लिमिटेड के संचालक मंडल की 5वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री निवास में 26.57 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित हो रहे जन-मन सभागार का निर्माण कार्य जनवरी 2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाए, ताकि आगामी बड़े आयोजनों और संवाद कार्यक्रमों के लिए सर्वसुविधायुक्त मंच उपलब्ध हो सके।
भोपाल और जबलपुर को मिलेगी सौगात
बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा वीआईपी और राजकीय अतिथियों की सुविधाओं के विस्तार के लिए दो बड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।  राजधानी में 130 करोड़ रुपए की लागत से 150 कक्षों की क्षमता वाला नया राज्य अतिथि गृह (स्टेट गेस्ट हाउस) तैयार किया जा रहा है। वहीं संस्कारधानी जबलपुर में 65 करोड़ रुपए की लागत से 75 कक्षों वाला आधुनिक सर्किट हाउस बनाया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज और अन्य प्रोजेक्ट्स समय पर हों पूरे
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में निगम द्वारा तैयार की जा रही सभी बड़ी अधोसंरचनाएं और मेडिकल कॉलेजों की इमारतें केंद्र सरकार के वायबिलिटी गैप फंडिंग (व्हीजीएफ) नॉर्म्स के आधार पर ही बनाई जाएं। वर्तमान में भवन विकास निगम द्वारा सिंगरौली, मंडला, रीवा, बुदनी और उज्जैन (मेडिसिटी) में कुल 5 मेडिकल कॉलेजों तथा उज्जैन में संयुक्त प्रशासनिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है।
निगम बनेगा रेवेन्यू जनरेटिंग बॉडी
निगम की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को रेवेन्यू जनरेटिंग बॉडी का गठन करने के निर्देश दिए, जिससे नए एवं वैकल्पिक आय के स्रोत विकसित किए जा सकें। इसके अलावा, बैठक में 25 करोड़ रुपए तक की निविदाओं की स्वीकृति के लिए प्रबंध संचालक को अधिकृत करने तथा महाप्रबंधक (निविदा) एवं महाप्रबंधक (रीडेंसिफिकेशन) के दो नए पद सृजित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
  विद्यार्थी एक साथ सीखेंगे जीवन कौशल के गुर
मेरी पाती, ड्रॉप-बॉक्स, एम्पावरमेंट स्टेशन्स और रंग-ए-उमंग वॉल से मुखर होंगे विद्यार्थी
भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और समग्र कल्याण (वेल-बीइंग) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के संयुक्त तत्वावधान में ‘उमंग दिवस’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘उमंग है तो ज़िंदगी में रंग है’ थीम पर केंद्रित इस विशेष आयोजन में प्रदेश भर के 9 हजार 339 शासकीय स्कूलों के लगभग 22 लाख विद्यार्थी एक साथ भाग लेंगे।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों को जीवन की चुनौतियों का सकारात्मकता से सामना करने, अपनी भावनाओं को समझने और आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का अवसर प्रदान करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए आवश्यकतानुसार परामर्श सेवाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
‘उमंग त्रिवेणी’ के तीन मुख्य स्तंभ
कार्यक्रम की रूपरेखा ‘उमंग त्रिवेणी’ फ्रेमवर्क पर आधारित है, जो तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इन श्रेणियों में  विश्व स्वास्थ्य संगठन (ॅभ्व्) द्वारा निर्धारित 10 प्रमुख लाइफ स्किल्स का विकास, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और समर्पित हेल्पलाइन (14425) की जानकारी, रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़कर लड़कों को ‘जेंडर चौंपियन’ के रूप में तैयार करना तथा लैंगिक समानता की भावना विकसित करना और छात्राओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सिखाना और शारीरिक स्वायत्तता के प्रति जागरूक करना है।
150 मिनट की रोचक गतिविधियां
प्रत्येक स्कूल में ढ़ाई घंटे (150 मिनट) का विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें उमंग एंथम, गोपनीय सवालों के समाधान के लिए ‘मेरी पाती’ ड्रॉप-बॉक्स, 4 एम्पावरमेंट स्टेशन्स (ड्रीम कैचर, सेल्फ डिफेंस, रोल प्ले और व्हिस्पर गेम) तथा ‘रंग-ए-उमंग’ वॉल जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इसके अतिरिक्त, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए यूएनएफपीए के सहयोग से विशेष मार्गदर्शिका तैयार की गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 110 मास्टर ट्रेनर्स द्वारा 9,449 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।


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