भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश के जल संसाधन विभाग में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और सुनियोजित कमीशनखोरी का बड़ा खुलासा किया है। पार्टी के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने एक पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि विभाग में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से फिक्स है, जहाँ एक प्रभावशाली बिचौलिया तंत्र और चुनिंदा कंपनियों का सिंडिकेट राज कर रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विभाग में 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों में कथित रूप से परसेंटेज मॉडल लागू है। नायक ने सवाल उठाया कि विभाग में पिछले डेढ़ साल से बड़े टेंडर क्यों नहीं निकले? उन्होंने नौशाद नामक व्यक्ति की संलिप्तता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि बिना किसी सरकारी पद के विभागीय निर्णयों में उसकी भूमिका क्यों और किसके इशारे पर है? क्या जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट के साथ उसके संबंध इन निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं?
मोंटेना कंपनी और रोटेशन का खेल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस मोंटेना कंपनी को कमलनाथ सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था, वह अब अलग-अलग नामों से फिर सक्रिय है। दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया में गिनी-चुनी कंपनियां ही बार-बार एल-1, एल-2 और एल-3 बनकर प्रतिस्पर्धा का दिखावा करती हैं। यह मात्र एक पूर्व-निर्धारित ’रोटेशन’ है, जिससे वास्तविक प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है।
कागजों पर कृषि वर्ष, जमीन पर सन्नाटा
नायक ने कहा कि सरकार ने बजट में हजारों करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं और ’कृषि वर्ष’ की घोषणा तो कर दी, लेकिन हकीकत यह है कि टेंडर प्रक्रिया ठप होने से परियोजनाएं शुरू ही नहीं हो पाईं। उन्होंने इसे किसानों और प्रदेश के करदाताओं के साथ बड़ा छल करार दिया।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
नायक ने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि 2023-24 के सभी टेंडरों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच हो, सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराकर मनी ट्रेल उजागर की जाए, संदिग्ध परिसरों की जांच कर सिंडिकेट में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाकर योग्य ठेकेदारों और युवाओं को अवसर दिए जाएं।