इसका एक बड़ा बदलाव पुराने भवनों और बस्तियों में देखने को मिल सकता है। ड्राफ्ट में पहले से बने भवनों और पुराने निर्माण को दोबारा विकसित करने की गुंजाइश रखने का प्रस्ताव है। जरूरत और तय नियमों के अनुसार एक भूखंड पर पहले से ज्यादा निर्माण किया जा सकता है। ऊंची इमारतों को भी जगह मिकती है। इसके साथ एक ही इलाके में घर और दुकान या घर और कार्यालय जैसी अलग-अलग गतिविधियां चलाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो वाले क्षेत्रों में नए नियमों को लागू करने से पुराने और घने इलाकों में ज्यादा इमारतें बनने से सड़क, पार्किंग और सीवरेज पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को पहले उन क्षेत्रों को चिह्नित करना चाहिए, जहां इस तरह की गतिविधियां संभव हो सकें।छोटे भूखंड मिलाकर बड़ा निर्माण और मिश्रित उपयोगमेट्रो के आसपास कुछ पुराने स्वीकृत भूखंडों को आपस में जोड़कर बड़ा भूखंड बनाने की अनुमति का भी प्रस्ताव है। खासकर 12 मीटर या इससे ज्यादा चौड़ी सड़क से लगे भूखंडों पर मिश्रित उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। इसका मतलब है कि ऐसे स्थानों पर एक ही परिसर में रहने के साथ दुकान या कार्यालय भी बनाया जा सकता है। लेकिन ज्यादा निर्माण के साथ सड़क और दूसरी सुविधाओं पर दबाव न बढ़े, इसके लिए भी योजना बनाने का प्रस्ताव है।ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट से मेट्रो स्टेशन के आसपास बड़ी-बड़ी इमारतें बन सकेंगी। इससे लोगों को छोटी दूरी के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। मेट्रो स्टेशन तक पैदल या साइकिल से आसानी से पहुंच हो, इसके लिए बेहतर रास्ते और सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। - सुमित गोठी, सचिव, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर इंडियाबुनियादी ढांचे को मजबूत करने और संतुलन की चुनौतीभोपाल विकास योजना-2047 में मेट्रो के आसपास ऊंची इमारतों और घर-दुकान-दफ्तर को साथ विकसित करने का प्रस्ताव तो अच्छा है, लेकिन भोपाल जैसे टियर-2 शहर में इसे लागू करना बुनियादी ढांचागत रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। व्यावसायिक रूप से सीमित और ऐतिहासिक रूप से जनसंख्या अनुमानों को न छू पाने वाले इस शहर में, कोर क्षेत्रों में अंधाधुंध एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) बढ़ाना इसके प्राकृतिक नालों, जल निकायों और मौजूदा सीवेज-पार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह जाम कर सकता है। - शीतल शर्मा, टाउन प्लानर