मदनमोहन मालवीय, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में मौजूद शत्रु संपत्तियों की खोजबीन नए सिरे से शुरू हुई है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में मौजूद शत्रु संपत्तियों की अद्यतन जानकारी मांगी है। इसके बाद जिला प्रशासन पुराने राजस्व रिकॉर्ड, संपत्तियों की स्थिति, कब्जे, स्वामित्व संबंधी प्रविष्टियों और मूल्यांकन का ब्योरा जुटाने में लगा है। भोपाल सहित करीब 12 जिलों में दर्ज शत्रु संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
प्रशासन पुराने रिकॉर्ड को मौजूदा अभिलेखों से मिलाने में जुटा
सूत्रों के अनुसार, तीन अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रस्तावित बैठक में प्रदेश की स्थिति रखी जा सकती है। केंद्र को भेजी जाने वाली जानकारी में केवल संपत्तियों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी पहचान, वर्तमान स्थिति, राजस्व रिकॉर्ड, कब्जा, मूल्यांकन, वर्गीकरण और सत्यापन का ब्योरा शामिल किया जा रहा है।
इसके साथ ही केंद्र स्तर से राज्य सरकार से अपेक्षित कार्रवाई और लंबित मामलों की जानकारी भी मांगी गई है। प्रशासन पुराने रिकॉर्ड को मौजूदा अभिलेखों से मिलाने में जुटा है।
भोपाल की जमीन सबसे अहम
भोपाल की शत्रु संपत्तियों का मामला सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, भोपाल में नवाब हमीदुल्ला खान की करीब 1500 एकड़ जमीन विवादित है। इनमें कोहेफिजा, फ्लैग स्टाफ हाउस, नूर-उस-सबाह पैलेस सहित कई संपत्तियों का उल्लेख होता रहा है।
नवाबी संपत्तियों से जुड़े मूल दस्तावेजों की जांच भी तेज की गई है। वहीं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा इससे जुड़ा रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिसे वह केंद्रीय गृहमंत्री के सामने पेश करेंगे।
अदालतों में लंबित मामलों का भी होगा हिसाब
शत्रु संपत्ति से जुड़े कई मामले लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में हैं। ऐसे में प्रशासन को रिकॉर्ड तैयार करते समय न्यायालयों में लंबित प्रकरण, वर्तमान कब्जा और राजस्व अभिलेखों की स्थिति भी शामिल करनी होगी।
जबलपुर के संबंध में विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में सात शत्रु संपत्तियों का उल्लेख है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सरकार जानकारी के आधार पर अपना पक्ष रखेगी।
क्यों अहम है केंद्र की कवायद?
मोटे तौर पर पाकिस्तान के किसी नागरिक या उससे संबंधित फर्म के नाम से देश में स्थित संपत्ति को शत्रु संपत्ति माना गया है। उसके मरने के बाद भी इसकी स्थिति नहीं बदलती। ऐसी संपत्ति राजसात होती है और उसका प्रबंधन शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत केंद्र सरकार करती है।