मध्य प्रदेश में आदिवासियों के बीच हिंदू न होने का भ्रम फैला रही कांग्रेस, जनगणना में अलग धर्म कोड की मांग

MP Politics: मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा कुछ समय पहले आदिवासियों से की गई 'गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं' की अ ...और पढ़ें

By Dhananajay Pratap SinghEdited By: Prashant Pandey  Publish Date: Fri, 16 Jan 2026 07:41:14 AM (IST)Updated Date: Fri, 16 Jan 2026 02:37:39 PM 

             मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जिनके बयान से गरमाया सियासी माहौल

HighLights

  1. चुनाव को ध्यान में रखकर पार्टी ने छेड़ी है आदिवासी बनाम हिंदू की बहस
  2. नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा है- 'गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं'
  3. आदिवासी वर्ग मध्य प्रदेश में सरकार बनाने अहम भूमिका निभाता है

धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया, भोपाल। जनगणना से ठीक पहले कांग्रेस आदिवासियों के बीच जाकर उन्हें स्वयं को हिंदू न मानने का भ्रम फैलाने की कोशिश में जुटी हुई है। इसके लिए पार्टी के नेता जनगणना में आदिवासियों को अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं। वे मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में जाकर आदिवासी समुदाय से अपील कर रहे हैं कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा कुछ समय पहले आदिवासियों से की गई 'गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं' की अपील के बाद कांग्रेस की यह कोशिश तेज हुई है। अब बड़वानी में सिंघार के ताजा बयान से मध्य प्रदेश में कांग्रेस की आदिवासी बनाम हिंदू के दांव से राजनीतिक माहौल गरमा रहा है।

भाजपा और कांग्रेस इन्हें साधने में कोई कसर नहीं छोड़ती

बता दें कि मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की संख्या अधिक होने से यह वर्ग सरकार बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस आदिवासी वर्ग को साधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़तीं। मध्य प्रदेश से ही जननायक बिरसा मुंडा की जयंती को गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा आरंभ हुई है।

पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता, 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को प्रदेश की किसी भी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। उसने आदिवासी बनाम हिंदू बहस वर्ष 2028-29 के चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है।

उल्टी पड़ सकती है समाज को बांटने की कोशिश

जनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की इस राजनीति कोशिश को समाज को बांटने के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। ऐसे में यह परवान नहीं चढ़ी तो यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक जोखिम बन सकती है। दरअसल, कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है।

इसके साथ ही पेसा नियम जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। माओवाद समाप्ति के बाद आदिवासी वर्ग मुख्यधारा में शामिल हो रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के सम वैचारिक संगठन आदिवासी समुदाय के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए।

भाजपा की प्रतिक्रिया- आदिवासियों को मुख्यधारा से काटना चाहती है कांग्रेस

मध्य प्रदेश भाजपा के मंत्री रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि राहुल गांधी और कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध के लिए है। ये विदेशी षड़यंत्रों को बढ़ावा दे रहे हैं। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। उमंग सिंघार का यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। कांग्रेस आदिवासियों को देश की मुख्यधारा से काटना चाहती है।


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