ड्रोन और सीसीटीवी से होगी जंगलों की चौकसी

बाघों के शिकार पर सख्ती, 15 फरवरी तक विशेष अभियान
भोपाल। प्रदेश में बाघों और अन्य वन्य प्राणियों के शिकार की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने आज से ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वन मंडलों में सघन गश्त और कड़ी निगरानी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य शिकारियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखते हुए उन्हें रंगे हाथों पकड़ना है।
वन विभाग ने बताया कि अभियान के दौरान आधुनिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। ’’ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क’’ के जरिए जंगलों के संवेदनशील इलाकों, प्रवेश मार्गों और संभावित शिकार स्थलों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। वन अमले को दिन और रात दोनों समय सक्रिय रहकर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में अब तक 56 बाघों की मौत हो चुकी है, जिसे वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 जनवरी से 15 फरवरी’’ तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें टाइगर रिजर्व और वन मंडलों में लगातार गश्त की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऊंचाई से ड्रोन निगरानी और रणनीतिक स्थानों पर सीसीटीवी की मदद से शिकारियों को भागने का कोई मौका नहीं मिलेगा।
शिकार में आधुनिक तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
रिपोर्टों के अनुसार शिकारी नुकीले तार और विद्युत लाइन तार का जाल बिछाकर वन्यजीवों को निशाना बना रहे हैं। वर्ष 2014 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश में विद्युत तार से शिकार के 933 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें 322 जंगली सूअर, 118 नीलगाय, 101 तेंदुआ और 39 बाघ शामिल हैं। अब तक 429 अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, बावजूद इसके घटनाएं थम नहीं रही हैं।


Leave Comments

Top