ईरान में पिछले दो हफ्तों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं। पहले जहां लोग महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन अब विरोध सरकार के खिलाफ राजनीतिक मांगों तक पहुंच गया है।ऐसे में एक और ईरान की सरकार इसे अराजकता और विदेशी प्रभाव बता रही है और सख्ती से निपटने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर अब इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य ताकत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के मुताबिक खामेनेई ने अपनी किस्मत पूरी तरह आईआरजीसी के हाथों में सौंप दी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस बल के बगावत करने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है, जबकि सेना और पुलिस के कुछ जवान मौजूदा हालात में उनका साथ छोड़ सकते हैं और अभी की स्थिती की बात करें तो मौजूदा सुरक्षा स्थिति जून में हुए युद्ध से भी ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। जाहिर सी बात है कि हो सकता है कि इसी डर के कारण खामेनेई सेना या पुलिस की तुलना में आईआरजीसी पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
ईरान में केवल नारों तक सीमित नही रहा प्रदर्शन
बता दें कि पिछले 14 दिनों से ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन अब केवल नारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदर्शनकारी सीधे सरकारी अधिकारियों और सरकारी संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। इसी क्रम में इस्फहान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग यानी आईआरआईबी के एक दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार नॉर्थ खोरासान प्रांत में एक घटना के दौरान एसफरायेन शहर के सरकारी अभियोजक अली अकबर होसैनजादेह और कई कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारी उस समय मारे गए जब वे जिस केबिन में शरण लिए हुए थे, उसमें आग लग गई। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरानी सैन्य अधिकारी मोहम्मद जवाद बख्शियान की भी मौत हो चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खामेनेई के करीबी माने जाने वाले अर्थशास्त्री सईद लेलाज ने भी उन्हें पद छोड़ने की सलाह दी है। एक अन्य ईरानी अधिकारी ने कहा कि सत्ता प्रतिष्ठान ने आज तक कभी विरोध प्रदर्शनों से इतना बड़ा खतरा महसूस नहीं किया जितना वह अब कर रहा है।
भूमिगत मिसाइल ठिकाने भी हाई अलर्ट पर
इतना ही नहीं ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। ये वही मिसाइल ठिकाने हैं जो जून में अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों के दौरान सुरक्षित रह गए थे। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार अमेरिका ने दखल दिया तो हालात पहले से बिल्कुल अलग होंगे और जवाब कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है। कुल मिलाकर ईरान इस समय अंदरूनी जन आक्रोश और बाहरी सैन्य खतरे के बीच फंसा हुआ है, जहां हर फैसला देश को और बड़े संकट की ओर ले जा सकता है।
केवल प्रदर्शन नहीं हैं ईरान की चिंता का विषय
अधिकारियों के अनुसार चिंता की वजह सिर्फ प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां भी हैं। एक अधिकारी ने कहा कि असली डर ट्रंप से है और ईरान ने देखा है कि उन्होंने वेनेजुएला के मामले में क्या किया था। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है या उन्हें मारती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगा। एक रेडियो इंटरव्यू में भी ट्रंप ने दोहराया कि अगर ईरानी बल लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो अमेरिका बहुत कड़ा हमला करेगा। इसी बात के आधार पर ईरानी अधिकारियों को डर है कि अमेरिका की दखलअंदाजी से एक बेहद विनाशकारी और प्रलय जैसे युद्ध की शुरुआत हो सकती है।