कांग्रेस की इकलौती राज्यसभा सीट पर सियासी संग्राम

दिग्विजय की साख बचेगी या राहुल की पसंद मारेगी बाज़ी?
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में साल 2026 की शुरुआत के साथ ही राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। अप्रैल 2026 में प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें रिक्त होने जा रही हैं, लेकिन मौजूदा संख्याबल के लिहाज़ से कांग्रेस के खाते में केवल एक ही सीट आती दिख रही है। यही एक सीट कांग्रेस के भीतर बड़े सियासी ‘दंगल’ की वजह बन गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। पार्टी के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेजेगी या नेतृत्व किसी नए चेहरे पर भरोसा जताएगा। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह अपने अनुभव, संगठन पर पकड़ और सक्रियता के दम पर सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। उनके समर्थक इसे अनुभव बनाम प्रयोग की लड़ाई मान रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की भूमिका भी इस समीकरण में अहम मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव के बाद हाशिए पर चले गए कमलनाथ क्या खुद के लिए या अपने किसी विश्वासपात्र को दिल्ली भेजने की रणनीति बनाएंगे, इस पर पार्टी के अंदरखाने में चर्चाएं तेज हैं। युवा और राहुल गांधी की पसंद माने जाने वाले नामों में मीनाक्षी नटराजन के नाम की भी सुगबुगाहट है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। संगठन में नई ऊर्जा के उद्देश्य से उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
ओबीसी कार्ड और युवा चेहरे
एक ओर जहां ओबीसी चेहरे के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और पूर्व मंत्री कलेश्वर पटेल की सक्रियता बढ़ी है, वहीं पार्टी में यह भी चर्चा है कि जातिगत संतुलन साधने के लिए कांग्रेस इस बार ओबीसी, दलित या आदिवासी उम्मीदवार पर दांव खेल सकती है। मगर कांग्रेस में दलित और आदिवासी वर्ग से राज्यसभा भेजने के लिए ऐसा कोई चेहरा नजर नहीं आता है, जो राज्यसभा के लिए दावेदारी करे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया का नाम जरूर सामने आ सकता है, लेकिन उनके नाम पर प्रदेश कांग्रेस में ही विरोध के स्वर भी नजर आएंगे और वर्तमान में उनकी सक्रियता भी नजर नहीं आ रही है।
हाईकमान के पाले में फैसला
विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट सुरक्षित रूप से जीतने लायक वोट हैं। लेकिन असली चुनौती पार्टी के भीतर सर्वसम्मति बनाने की है। यदि गुटबाजी हावी होती है, तो अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को ही लेना होगा। कुल मिलाकर कांग्रेस की यह एकमात्र राज्यसभा सीट सिर्फ संसद पहुंचने का रास्ता नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर नेतृत्व, भरोसे और भविष्य की दिशा तय करने की कसौटी बन चुकी है।

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