हिन्दू बच्चों को मदरसों में प्रवेश, शिक्षा विभाग की नाकामी

 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य  ने उठाए सवाल
भोपाल। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनकों ने मदरसों में हिन्दू बच्चों के पढ़ने को लेकर कहा कि यह शिक्षा विभाग की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति बनाने वाले एनजीओ तो दृष्टिहीन हैं, विभाग को दृष्टि का दोष है ठीक करवाएंगे।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनकों ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर लोक शिक्षण संचालनालय के एक पत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य के मुरैना और अम्बाह के मदरसों में हिन्दू बच्चों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के मदरसों में 550 हिंदू बच्चों का अध्ययनरत होना शिक्षा विभाग की नाकामी को दर्शाता है। यह स्थिति तब है, जब सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आबादी के अनुसार एक से तीन किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल खोले गए हैं। कानूनकों ने कहा कि जब सरकारी विभाग स्कूल प्रवेश अभियान चलाते हैं, तब ये बच्चे आंकड़ों और अभियानों से बाहर क्यों रह जाते हैं, यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नीति निर्माण से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि नीति बनाने वाले संगठनों में दृष्टि का अभाव है और विभागीय स्तर पर भी कमियां हैं, जिन्हें सुधारने की आवश्यकता है।
फौजी तैयार करने वाले स्कूलों के रूप में रही है मुरैना की पहचान
उन्होंने विशेष रूप से मुरैना जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जिला सामाजिक रूप से जागरूक माना जाता है, ऐसे में वहां समाज के सजग नागरिकों को घर-घर संपर्क कर बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुरैना की पहचान देश की सेवा करने वाले फौजी तैयार करने वाले स्कूलों से रही है, मौलवी बनाने वाले मदरसों से नहीं।


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