सियासत: इंडिया ब्लॉक 30 अक्तूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाएगा जन महाभियोग, 1 नवंबर को निकालेगा दिल्ली मार्च

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 24 Oct 2026 11:01 PM IST

इंडिया ब्लॉक गठबंधन 30 अक्तूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जनता के सामने महाभियोग’ नाम से प्रतीकात्मक कार्यवाही करेगा। इसके अगले दिन 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ रैली होगी, जिसमें कांग्रेस ने 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। आखिर विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों कर रहा है? एसआईआर पर क्या आरोप हैं? क्या दिल्ली मार्च विपक्षी एकता का बड़ा प्रदर्शन बनेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

Congress Preparations for November 1 INDIA Bloc Rally in Delhi 10 Lakh People Over Vote Chori Allegations

30 अक्तूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या होगा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। गठबंधन के नेता 30 अक्तूबर को दिल्ली में एक 'जनता के सामने महाभियोग' यानी प्रतीकात्मक संसदीय कार्यवाही करेंगे और उनके खिलाफ जनता का फैसला सुनाने की घोषणा करेंगे। इसके अगले दिन, 1 नवंबर को 'दिल्ली चलो मार्च' निकाला जाएगा, जो रामलीला मैदान में समाप्त होगा। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, विपक्ष का लक्ष्य इन कार्यक्रमों के जरिए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संदेश देना है।

30 अक्तूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या होगा?
विपक्षी इंडिया ब्लॉक 30 अक्तूबर को दिल्ली के होटल अशोक में 'मॉक पार्लियामेंट' यानी प्रतीकात्मक संसद आयोजित करेगा। इसमें विपक्षी सांसदों और प्रमुख नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। इस कार्यक्रम को 'जनता के सामने महाभियोग' नाम दिया गया है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस कार्यवाही के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के समर्थन में जनता का फैसला घोषित किया जाएगा। हालांकि, यह विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
1 नवंबर को दिल्ली में कौन-सा मार्च निकाला जाएगा?
विपक्ष 1 नवंबर को 'दिल्ली चलो मार्च' निकालेगा, जिसका समापन रामलीला मैदान में होगा। कांग्रेस ने इसे 'वोट चोरी' के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी रैली बनाने की तैयारी की है। केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि इस कार्यक्रम में देशभर से लोग शामिल होंगे। महिला कांग्रेस प्रमुख अलका लांबा ने बताया कि पार्टी ने रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम के कारण रैली को टालने या रद्द करने का सवाल नहीं है। यह संख्या कांग्रेस का लक्ष्य है, इसमें शामिल होने वालों की वास्तविक संख्या नहीं।
विपक्ष किन मुद्दों पर चुनाव आयोग को घेर रहा है?
इंडिया ब्लॉक की मुख्य मांगों में मतदाता सूची से कथित तौर पर लाखों नाम हटाए जाने का मुद्दा और एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार और चुनाव आयोग पर जवाब देने का दबाव बढ़ाया जाना चाहिए। कांग्रेस के मुताबिक, 30 अक्तूबर की प्रतीकात्मक कार्यवाही और 1 नवंबर की रैली का उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा तथा कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता दिखाना है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
कांग्रेस ने कार्यक्रम सफल बनाने के लिए क्या तैयारी की है?
कांग्रेस नेतृत्व ने शनिवार को पार्टी के अग्रिम संगठनों और दिल्ली इकाई के नेताओं के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अग्रिम संगठनों और विभागों के प्रमुखों से चर्चा की। बैठक में पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन भी शामिल हुए। इससे एक दिन पहले उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नेताओं के साथ बैठकें हुई थीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंडिया ब्लॉक के दलों के नेताओं से संपर्क किया है और दोनों कार्यक्रमों के लिए दिल्ली में मौजूद रहने की अपील की है।
क्या इससे पहले भी विपक्ष ने एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया था?
12 अक्तूबर को 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के आसपास तक पहुंचा था। उस दौरान विपक्ष के प्रमुख नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ में हिस्सा लिया था। भारी बैरिकेडिंग के बीच हुए इस प्रदर्शन के बाद एसआईआर के खिलाफ संयुक्त याचिका भी दाखिल की गई थी। अब विपक्ष 30 अक्तूबर की प्रतीकात्मक कार्यवाही और 1 नवंबर की रैली के जरिए इसी मुद्दे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इन कार्यक्रमों से विपक्षी एकता का प्रदर्शन करने और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की जाएगी।

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