वोल्कर तुर्क
जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था यूरोप में जारी विरोध प्रदर्शनों को पर एक महीने बाद बयान जारी किया है। इसमें प्रदर्शनकारियों से बातचीत का आह्वान किया गया है। बयान में हिरासत में लिए गए हजारों लोगों का जिक्र तक नहीं किया गया है। वहीं, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को उचित ठहराया गया है। जबकि वही एजेंसी भारत में विरोध प्रदर्शनों पर तुरंत बयान जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर चिंता जताती है। हिरासत में लिए गए लोगों पर भी चिंता जताते हुए कानून लागू करने वाली एजेंसियों से संयम की अपील करती है।
यूरोप में हिंसक विरोध प्रदर्शन
वर्तमान में यूरोप के कई देशों में महंगाई, आवास संकट (महंगे घर), बढ़ती शिक्षा लागत और सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जो कई जगहों पर हिंसक रूप ले चुके हैं। फ्रांस, इटली, अल्बानिया, बेल्जियम, पुर्तगाल और स्पेन हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा हिंसा फ्रांस में देखने को मिली है। पेरिस, मार्सिले, ल्यों और लिमोज़ जैसे शहरों में हिंसक विरोध हुए हैं। इटली के मिलान और अन्य शहरों में पुलिस की प्रदर्शनकारियों से झड़पें हुई हैं। अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र हो गए हैं। बेल्जियम के ब्रसेल्स और लीज में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। लिस्बन और मैड्रिड में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं।
यूरोप में हिंसक प्रदर्शन पर UNHRC ने क्या कहा?
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में UNHRC के प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा, "अल्बानिया, बेल्जियम, फ्रांस, इटली और पुर्तगाल में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन मानव अधिकार संबंधी चिंताएं बढ़ा रहे हैं। मैं हिंसा के सभी कृत्यों की निंदा करता हूं और शामिल सभी लोगों से तनाव कम करने तथा आगे किसी भी तरह की हिंसा को रोकने का आह्वान करता हूं। आगे बढ़ने का सबसे अच्छा और एकमात्र रास्ता समावेशी और सुरक्षित संवाद है।
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उन्होंने आगे कहा, लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने और अपनी बात सुनाने का अधिकार है। राज्यों (सरकारों) को इन अधिकारों को सुगम बनाना चाहिए। मैं सार्वजनिक और निजी संपत्ति के खिलाफ हिंसा और तोड़फोड़ करने के लिए विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाने वाले लोगों के कृत्यों पर दुख व्यक्त करता हूं। उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मैं प्रदर्शनकारियों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, के खिलाफ अनावश्यक और अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्टों से चिंतित हूं। राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून प्रवर्तन की कोई भी प्रतिक्रिया कानून के दायरे में, आवश्यक और आनुपातिक हो। बल के गैर-कानूनी उपयोग के आरोपों की तुरंत, प्रभावी और स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए, तथा पीड़ितों के लिए जवाबदेही और प्रभावी उपचार सुनिश्चित किए जाने चाहिए।"
भारत में विरोध प्रदर्शन पर UNHRC ने क्या कहा?
UNHRC ने चंद दिनों पहले भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों के तुरंत बाद लंबा-चौड़ा बयान जारी किया। इसमें उसने लिखा, "दिल्ली में आज के बड़े पैमाने के प्रदर्शनों से पहले और उसके दौरान प्रदर्शनकारियों, विरोध प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को भारत में बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की रिपोर्टों से हम चिंतित हैं।" आयोग ने आगे कहा, "हम अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं कि शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का पूरी तरह से सम्मान और पालन किया जाए। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता के सख्त परीक्षणों पर खरा उतरना चाहिए।
लोगों को हिरासत में लेने पर जताई थी चिंता
भारतीय अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून प्रवर्तन बल देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानव अधिकारों के दायित्वों के अनुरूप, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति अत्यधिक संयम बरतें। मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए। हम अधिकारियों से व्यक्त की गई व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए अर्थपूर्ण संवाद में शामिल होने का भी आग्रह करते