दशहरा रैली में उद्धव का एलान: 'सरकार बदलने के लिए साथ आना होगा', लॉरेंस को लेकर सीएम फडणवीस को दी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 20 Oct 2026 09:33 PM IST

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई की दशहरा रैली में भगवा झंडे को अपनी पहचान बताते हुए लाल किले पर भी इसे फहराने की बात कही। उन्होंने भाजपा पर हिंदुत्व को बदनाम करने, लोगों को बांटने और वोट चोरी के आरोप लगाते हुए सरकार बदलने का आह्वान किया।

Uddhav Thackeray said saffron flag hoisted everywhere from Maharashtra Legislative Assembly to Red Fort

उद्धव ठाकरे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई की दशहरा रैली में भगवा झंडे को अपनी पहचान बताते हुए लाल किले पर भी इसे फहराने की बात कही। उन्होंने भाजपा पर हिंदुत्व को बदनाम करने, लोगों को बांटने और वोट चोरी के आरोप लगाते हुए सरकार बदलने का आह्वान किया।

लाल किले तक भगवा फहराने का संकल्प
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पार्टी की दशहरा रैली के दौरान कहा कि भगवा उनकी पहचान है और इसे कोई उनसे छीन नहीं सकता। भगवा झंडा सिर्फ महाराष्ट्र विधानसभा के ऊपर ही नहीं, बल्कि लाल किले पर भी फहराया जाना चाहिए। शिवाजी पार्क में आयोजित रैली में उद्धव ठाकरे ने युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विरोध करना युवाओं का अधिकार है, क्योंकि हर किसी के साथ, खासकर नए मतदाताओं के साथ, ‘वोट चोरी’ हो रही है। अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने वाले युवा नक्सली नहीं, बल्कि क्रांतिकारी हैं।

सरकार बदलने के लिए लड़ाई जारी
उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में बदलाव लाने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार बदलने के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील की। साथ ही भरोसा जताया कि आने वाले समय में अच्छे दिन जरूर आएंगे।
तिरंगे के रंगों को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह तिरंगे के रंगों को अलग-अलग करके लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय ध्वज की एकता और उसके रंगों के महत्व को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, रंगों के नाम पर समाज में बंटवारा करना सही नहीं है।
 
‘भगवा पहनकर महिलाओं से छेड़छाड़ करने वाले सच्चे हिंदुत्ववादी नहीं’
उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि भगवा गमछा पहनकर महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों का हिंदुत्व स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाजपा की राजनीति हिंदुत्व की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। दशहरा रैली के अंत में ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सरकार बदलने के लक्ष्य के साथ जुट जाने को कहा। उन्होंने अच्छे दिन लाने का वादा करते हुए कहा कि इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। रैली में दिए गए उनके बयानों से साफ है कि शिवसेना (यूबीटी) आगामी राजनीतिक लड़ाई में भाजपा को निशाने पर रखने की तैयारी कर रही है।

'भाजपा सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च करती है'
भाजपा पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च करती है, लेकिन किसानों को सिर्फ 5,000 रुपये देती है। पिछले 12 साल में भाजपा ने आखिर क्या किया? उन्होंने न तो हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की और न ही देश को आगे ले जाने का काम हुआ। मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन के लिए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उन्हें बेईमान कहती रही, जबकि चंपत राय को क्लीन चिट दे दी गई। 

'जब सरकार बदलेगी तब महाराष्ट्र तरह चमकेगा'
दशहरा रैली के दौरान ठाकरने सीजेपी को समर्थन देने पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह देश के पहले राजनीतिक नेता हैं, जिन्होंने अभिजीत दीपके का समर्थन किया था और आज भी उनके साथ खड़े हैं। देश बदल रहा है और जनता जाग रही है। ठाकरे ने विश्वास जताया कि जब सरकार बदलेगी, तब महाराष्ट्र देवी भवानी की तलवार की तरह चमकेगा।

लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर फडणवीस को उद्धव ठाकरे की चुनौती
दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर चुनौती दी। उन्होंने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल में बंद है और उसके गुर्गे 70 हजार शूटर होने का दावा करते हैं। अगर आपमें सच में हिम्मत है, तो साबरमती जाइए और दिल्ली में बैठे अपने बॉस के सामने से लॉरेंस बिश्नोई को खींचकर बाहर निकालिए। इसके बाद बड़ी-बड़ी बातें कीजिए। सरकार अपराध और जन सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय अपनी छवि चमकाने में लगी है। देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने के लिए सत्ताधारी दल को जल्द ही राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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