संघ शताब्दी वर्ष समापन समारोह: धनखड़ को न्योते पर अटकलें तेज, कांग्रेस बोली- संघ, भाजपा के अंतर्विरोध उजागर

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 15 Oct 2026 09:17 PM IST

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अगले सप्ताह नागपुर में विजयादशमी पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वार्षिक उत्सव में आमंत्रित किया गया है। जगदीप धनखड़ को मिले इस न्यौते पर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने धनखड़ के बहाने संघ और भाजपा पर निशाना साधा है। 

विस्तार

संघ का हर साल होने वाला विजयादशमी समारोह हर बार किसी ने किसी कारण से चर्चा में रहा है। कभी मुख्य अतिथि के रूप में दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को मिले आमंत्रण पर तो कभी किसी अन्य अतिथि पर। इस बार के समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को संघ की ओर से मिले न्योते पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कांग्रेस इसे भाजपा और संघ के बीच टकराव के रूप में प्रचारित कर रही है, जबकि भाजपा चुप है। यह चर्चा तब उफान पर है जब पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ इस समारोह के मुख्य अतिथि नहीं हैं।

दरअसल इस बार संघ का हर साल होने वाला विजया दशमी समारोह बेहद खास है, क्योंकि इसके साथ ही संघ अपने शताब्दी वर्ष का समापन समारोह भी आयोजित कर रहा है। हमेशा की तरह इस समारोह में मुख्य भाषण संघ प्रमुख मोहन भागवत का होगा। अतिथि के तौर पर पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ और मध्य एशिया भारत में इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच।
धनखड़ मामले में चर्चा का कारण
बतौर उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदन चलाने और सार्वजनिक जीवन में न्यायपालिका पर सीधा हमला बोलने के लिए चर्चित धनखड़ ने 2018 में बेहद कटुतापूर्ण सियासी परिस्थितियों में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार और उनके बीच कटुता तब अचानक चरम पर पहुंची जब हाईकोर्ट के जज यशवंत शर्मा के घर पर मिले अधजले नोट मामले में उन्होंने बिना सलाह के विपक्ष के महाभियोग के नोटिस को स्वीकार कर लिया। विवाद इसलिए बढ़ा की सरकार खुद इस मुहिम की अगुवाई करना चाहती थी। हालांकि विवाद बढऩे के बाद अचानक धनखड़ के इस्तीफे की खबर आई।                                                                                 कांग्रेस ने बोला हमला
धनखड़ को मिले न्योते पर कांग्रेस हमलावर है। पार्टी इसे संघ और भाजपा के बीच मची खींचचान के रूप में प्रचारित कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस न्योते ने संघ और भाजपा के बीच जारी अंतर्विरोध को उजागर किया है। ऐसे समय में जब मोदी सरकार इस्तीफा देने के बाद धनखड़ को सरकार ने उनका सरकारी आवास के अधिकार की अनदेखी की है, ऐसे समय में संघ उन्हें विजया दशमी समारोह में आमंत्रित किया है।
क्या है संघ का कहना?
भाजपा ने इसे संघ का आंतरिक मामला बताया। दूसरी ओर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि विजया दशमी उत्सव में अतिथि के तौर पर हर साल विभिन्न विचारधारा के लोग आते रहते हैं। संघ भी उन्हें अवसर देता है कि उपस्थित रह कर संघ को जाने। पदाधिकारी ने कहा कि संघ ने तो प्रणब मुखर्जी जो जीवन पर्यंत कांग्रेस के साथ रहे उन्हें मुख्य अतिथि बनाया। जहां तक धनखड़ को न्योते का सवाल है तो क्या उन्होंने पद से इस्तीफा देने के बाद सरकार या हिदुत्व की विचारधारा का उल्लंघन किया है?

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