सॉलिसिटर जनरल से मिले मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के फैसले के बाद की रणनीति पर मंथन
भोपाल। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर राज्य सरकार अब आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं और आगामी कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण को लेकर उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े विधिक पहलुओं तथा आगे की कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ है। मुख्यमंत्री की इस मुलाकात को हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की अगली कानूनी रणनीति तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख या इस संबंध में किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अगली कार्रवाई पर नजर
ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें हैं। यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देती है, तो उसे आरक्षण बढ़ाने के फैसले के समर्थन में अपने कानूनी तर्क और संवैधानिक आधार प्रस्तुत करने होंगे। सॉलिसिटर जनरल और महाधिवक्ता के साथ हुई चर्चा को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए सरकार
ओबीसी आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि राज्य की सरकार यदि ओबीसी को आरक्षण दिलाना चाहती है तो उसे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सर्वाेच्च न्यायालय में स्थगन प्राप्त करने के लिए परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि ओबीसी आरक्षण मसले पर सर्वदलीय बैठक हो चुकी है, इसलिए मुख्यमंत्री को सत्र का विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कानून पारित करना चाहिए। सरकार को ओबीसी को झूठे सपने दिखाना बंद कर देना चाहिए। भाजपा सरकार की नीयत साफ है तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए।
कमलनाथ सरकार ने 2019 में बढ़ाया था आरक्षण
ओबीसी आरक्षण का यह मामला वर्ष 2019 से कानूनी प्रक्रिया में है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए अध्यादेश लागू किया था। बाद में इसे अधिनियम का रूप दिया गया। आरक्षण में वृद्धि के इस फैसले को लेकर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली। हाल ही में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने संबंधित कानून को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया और ओबीसी आरक्षण को फिर से 14 प्रतिशत तक सीमित कर दिया।
दशहरे तक किसानों की समस्याएं हल करें, नही तो आंदोलन
खाद, बिजली, समर्थन मूल्य और फसल नुकसान को लेकर किसान संघ ने दी चेतावनी
भोपाल। बिजली कटौती, खाद की किल्लत, मंडियों की अव्यवस्था और बारिश की मार से परेशान किसानों के मुद्दों पर भारतीय किसान संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने सरकार को दशहरे तक समस्याओं का समाधान करने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाएं पटरी से उतर रही हैं, लेकिन सरकार समय पर समस्याओं का निराकरण नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहिए। संघ ने मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत नहीं होने पर भी नाराजगी जताई है।
सिंचाई के लिए 12 घंटे बिजली की मांग
संघ ने बिजली कटौती को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए सिंचाई के लिए प्रतिदिन 12 घंटे बिजली देने की मांग की है। आंजना के मुताबिक, पिछले करीब 10 दिनों में बिजली की समस्या बढ़ी है। खेतों में मोटरें चालू होने के साथ आपूर्ति का संकट सामने आने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मेंटेनेंस के नाम पर घरेलू बिजली कटौती से भी लोगों को परेशानी हो रही है।
भावांतर नहीं, समर्थन मूल्य पर खरीदी हो
किसान संघ ने कहा कि भावांतर योजना के बजाय किसानों की उपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाए। मंडियों में अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को फसल बेचने में दिक्कत हो रही है। संघ ने खरीदी व्यवस्था स्पष्ट करने और उपज का उचित मूल्य दिलाने की मांग की है।
ई-टोकन से खाद वितरण तक परेशानी
आंजना ने आरोप लगाया कि ई-टोकन प्रणाली और सरकारी पोर्टल की जटिलताओं से किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। संघ ने खाद की पर्याप्त उपलब्धता और वितरण व्यवस्था सरल बनाने की मांग की।
कहीं अतिवृष्टि, कहीं बोवनी प्रभावित
संघ के अनुसार, अधिक बारिश से कई जिलों में मूंग, उड़द, मक्का और मूंगफली की फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में बोवनी बाधित है। संघ ने नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने तथा कम बारिश वाले इलाकों में सिंचाई, पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की व्यवस्था के लिए अलग कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
108 एम्बुलेंस, जननी एक्सप्रेस सेवाओं में वित्तीय अनियमितताओं का मामला लोकायुक्त पहुंचा
25 नवंबर तक मांगा गया प्रतिवेदन
भोपाल। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित 108 एम्बुलेंस और 108 जननी एक्सप्रेस सेवाओं के संचालन में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और अनुबंध शर्तों के उल्लंघन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं मुकेष नायक और पुनीत टंडन द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों के बाद अब यह मामला लोकायुक्त कार्यालय पहुंच गया है। लोकायुक्त ने प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा एनएचएम के मिशन संचालक को पत्र जारी कर आगामी 25 नवंबर तक तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता पुनीत टंडन द्वारा शपथ-पत्र के साथ दर्ज कराई गई शिकायत में सेवा प्रदाता जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस को वर्ष 2024 तक लगभग 948 करोड़ रुपये के भारी-भरकम भुगतान पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अनुबंध की शर्तों, कर भुगतान और वैधानिक दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। जांच के दायरे में कई अन्य गंभीर बिंदु भी शामिल हैं, जिनमें मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ पंजीकरण नंबर की एम्बुलेंस का संचालन, डिंडोरी व शहडोल जिलों में रनिंग किलोमीटर के सत्यापन के दौरान मरीजों के नाम और मोबाइल नंबर जैसी आवश्यक जानकारियों का अभाव, तथा विदिशा जिले में दर्ज असामान्य किलोमीटर विवरण प्रमुख हैं। इसके अलावा, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कर्मचारियों की नियुक्ति व वेतन से जुड़ी अनियमितताओं के भी आरोप लगाए गए हैं।
लोकायुक्त कार्यालय के इस कदम के बाद स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगे जाने की प्रक्रिया है, जिसे अंतिम जांच निष्कर्ष या आरोप सिद्ध नहीं माना जा सकता, फिर भी इस उच्चस्तरीय जांच से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
मनमानी फीस, छात्रसंघ चुनाव बहाली और छात्रावासों में सुविधाओं को लेकर किया प्रदर्शन
भोपाल। राजधानी भोपाल में विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन (जीएसयू) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को संगठन के बैनर तले भोपाल के प्रमुख रोशनपुरा चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी फीस, छात्रवृत्ति व आवास सहायता राशि में वृद्धि, छात्रसंघ चुनाव की बहाली और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर छात्रों ने बुलंद आवाज में सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से प्रशासन और सरकार को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन का कहना है कि प्रदेशभर के विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के दौरान भारी आर्थिक संकट के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के आभाव का भी सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों के सरकारी स्कूलों और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रावासों की दयनीय स्थिति पर संगठन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं का कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को छात्रावासों में मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हो पा रही हैं। संगठन ने मांग की है कि छात्रावासों में स्वच्छ भोजन, शुद्ध पेयजल, निर्बाध बिजली, शौचालय और सुरक्षित परिसर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए छात्रावासों की कुल संख्या और सीटों में भी इजाफा किया जाए।
छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग
जीएसयू ने प्रदेश के तमाम शासकीय और निजी महाविद्यालयों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की मांग की है। संगठन ने जोर देकर कहा कि चुनाव संपन्न कराने के लिए सरकार को एक स्पष्ट नीति और निश्चित समय-सीमा तय करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए लंबित भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने तथा वर्ग-3 के चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र दिए जाने की पुरजोर मांग भी उठाई गई है।
विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर जल्द होंगी भर्तियां
46 पैमानों पर होगा प्रदर्शन का मूल्यांकन
भोपाल। उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत आवंटित राशि का समय-सीमा के भीतर सही उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
मंत्रालय में आज मंत्री परमार की उपस्थिति में उच्च शिक्षा विभाग और राज्य के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के बीच एक ऐतिहासिक डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय प्रगति का आंकलन पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों और सत्यापित उपलब्धियों के आधार पर किया जाएगा। विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन को मापने के लिए 7 प्रमुख क्षेत्रों में 46 की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स तय किए गए हैं। इनमें एनईपी-2020 का क्रियान्वयन, शैक्षणिक कैलेंडर का पालन, समर्थ ईआरपी और ई-ऑफिस का उपयोग, शोध एवं पेटेंट, एनएएसी ग्रेडिंग तथा रोजगारपरकता जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।
सत्यापित आंकड़ों के आधार पर तय होंगे लक्ष्य
व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए शैक्षणिक सत्र 2025-26 को श्आधार वर्षश् माना गया है। विश्वविद्यालयों द्वारा प्रस्तुत सत्यापित आंकड़ों के आधार पर ही 2026-27 से 2028-29 तक के लक्ष्य तय किए जाएंगे। यदि समीक्षा में कोई कमी पाई जाती है, तो समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री ने डिजिटल मूल्यांकन को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन कदमों से विद्यार्थियों को समय पर परिणाम और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
छूटे हुए पात्र मतदाता सूची में दर्ज कराएं नाम
राजनीतिक दलों के साथ निर्वाचन आयोग की बैठक
भोपाल। फोटो निर्वाचक नामावली को अपडेट करने तथा छूटे हुए पात्र मतदाताओं और युवा नागरिकों के नाम जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश के प्रमुख मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रदेश भर में चलाए जा रहे निरंतर अद्यतन अभियान के तहत पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं और किसी कारणवश छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम सूची में दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से इस प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सुगम बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
अलग से घोषणा-पत्र की जरूरत नहीं
झा ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या पहली बार पात्र बने नागरिक फॉर्म-6 भरकर अपना नाम सूची में जुड़वा सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक नियम अनुसार पहचान एवं पते के दस्तावेज़ जमा करने होंगे। निर्वाचन आयोग ने यह राहत दी है कि फॉर्म-6 जमा करने के बाद अब अलग से कोई घोषणा-पत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।
हर जिले में विशेष मार्गदर्शन अभियान
नए एवं छूटे हुए मतदाताओं की सुविधा के लिए मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में विशेष जागरूकता एवं पंजीयन अभियान चलाया जा रहा है। तहसील स्तर पर उप-विभागीय अधिकारी व तहसीलदार तथा जिला स्तर पर जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।