मुख्यमंत्री को धमकी, आरोपी मुंबई में गिरफ्तार

                  डायल-112 के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर भेजा था आपत्तिजनक संदेश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। धमकी डायल-112 की आधिकारिक व्हाट्सएप हेल्पलाइन पर भेजी गई थी। संदेश में मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ जान से मारने की सीधी धमकी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल क्राइम ब्रांच ने साइबर तकनीक की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले सुबह करीब 11.30 बजे भदभदा स्थित पुलिस रेडियो मुख्यालय में संचालित डायल-112 के व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर पर धमकी भरा संदेश आया था। आरोपी ने संदेश में मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और साक्ष्य मिटाने के प्रयास में भेजे गए संदेश को दो बार एडिट किया। हर बार उसमें और आपत्तिजनक बातें जोड़ी गईं। इसके बाद उसने पूरा संदेश डिलीट कर दिया। हालांकि, हेल्पलाइन पर तैनात पुलिसकर्मियों ने संदेश डिलीट होने से पहले ही उसका स्क्रीनशॉट सुरक्षित कर लिया। यही स्क्रीनशॉट जांच में अहम साक्ष्य बना।
आईपी एड्रेस और टावर लोकेशन से मुंबई तक पहुंची पुलिस
धमकी की जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। इसके बाद पुलिस रेडियो मुख्यालय की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। गुरुवार को जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद साइबर टीम ने संबंधित मोबाइल नंबर का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। जांच में मोबाइल नंबर के आईपी एड्रेस और टावर लोकेशन के आधार पर संदेश मुंबई से भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद भोपाल क्राइम ब्रांच की विशेष टीम मुंबई रवाना हुई। स्थानीय पुलिस की मदद से टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर धमकी के पीछे की वजह और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
वीआईपी सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट
घटना के बाद भोपाल समेत पूरे प्रदेश में वीआईपी सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री निवास, एनेक्सी भवन और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
 पटवारी बनेंगे राजस्व निरीक्षक, 1050 को पदोन्नति मिलेगी
भोपाल। प्रदेश सरकार पटवारियों को पदोन्नति का तोहफा देने की तैयारी में है। प्रदेशभर में करीब 1050 पटवारियों को पदोन्नत कर राजस्व निरीक्षक बनाया जाएगा। इसके लिए राजस्व विभाग और भू-संसाधन प्रबंधन ने प्रशासनिक प्रक्रिया तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पदोन्नति के लिए पात्र पटवारियों की सूची तैयार की जा रही है। इस संबंध में भू-संसाधन प्रबंधन ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर पात्र पटवारियों की सेवा से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं। पदोन्नति प्रक्रिया के तहत 50 वर्ष से कम आयु वाले पटवारियों की सूची तैयार की गई है। कलेक्टरों को संबंधित पटवारियों का सेवा रिकॉर्ड, विभागीय जांच की स्थिति और गोपनीय चरित्रावली (सीआर) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन दस्तावेजों के परीक्षण के बाद पात्रता के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
 अमित शाह के दौरे की तैयारी, संदीपनी स्कूलों की इमारतों का करेंगे उद्घाटन
भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित प्रदेश दौरे को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। दौरे के दौरान राज्यभर में तैयार की गई नई संदीपनी स्कूलों की इमारतों का उद्घाटन किए जाने की संभावना है। विभाग फिलहाल कार्यक्रम के लिए स्थान और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, उद्घाटन के लिए राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, कार्यक्रम की तारीख और स्थान अभी तय नहीं हुए हैं। फिलहाल 35 संदीपनी स्कूलों की इमारतें उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 17 अन्य भवनों का निर्माण अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक, इन 17 भवनों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। यदि तय कार्यक्रम से पहले इनका निर्माण पूरा हो जाता है, तो इन्हें भी उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। अंतिम निर्णय भवनों की तैयार स्थिति और कार्यक्रम की तारीख तय होने के बाद लिया जाएगा।
275 स्कूलों का संचालन, विस्तार की तैयारी
संदीपनी स्कूल योजना के पहले चरण के तहत मध्य प्रदेश में 275 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार इस पहल का विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रही है। दीर्घकालिक योजना के तहत प्रदेश में संदीपनी स्कूलों की संख्या करीब 1,000 तक ले जाने का लक्ष्य बताया जा रहा है। पहले चरण में 276 स्कूलों की योजना थी, जबकि सरकार आगामी चरणों में नए स्कूल शुरू करने की तैयारियों पर भी काम कर रही है। नई इमारतों का निर्माण पूरा होने के साथ संदीपनी स्कूलों के विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
 21 साल बाद आया भोपाल का मास्टर प्लान, 2047 तक विकास की नई रूपरेखा
भोजताल, वन क्षेत्र और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण पर जोर
भोपाल। लंबे इंतजार के बाद राजधानी भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान का प्रारूप सामने आ गया है। भोपाल विकास योजना-2047 के जरिए शहर के अगले दो दशकों के विकास की रूपरेखा तय की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गणेश अनंत चतुर्दशी के अवसर पर योजना के प्रारूप के प्रकाशन की जानकारी साझा की। नई विकास योजना में भोपाल की प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ बेहतर नागरिक सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन किया गया है। उनके मुताबिक योजना को भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र जैसी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। साथ ही नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और आर्थिक विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
हरित क्षेत्र 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव
मास्टर प्लान में शहर के हरित क्षेत्र को मौजूदा 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके साथ हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति और विकासकर्ताओं को हरित टीडीआर के माध्यम से अतिरिक्त विकास की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। प्रकाशित प्रारूप पर नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं। इसके जरिए शहरवासी प्रस्तावित विकास योजना को लेकर अपनी राय दर्ज करा सकेंगे।
महानगरीय विकास से लेकर ग्रोथ कॉरिडोर तक
भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए महानगरीय अवधारणा के अनुरूप प्रावधान किए गए हैं। ग्रोथ कॉरिडोर के माध्यम से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर भी जोर दिया गया है। राज्य की टीडीपी नीति के अनुरूप मिश्रित भूमि उपयोग के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।
भवन निर्माण नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
प्रारूप में असीमित एफएआर और भवन ऊंचाई से जुड़े प्रावधानों के साथ विकास मापदंडों को सरल और युक्तिसंगत बनाने की बात कही गई है। निजी विकासकर्ताओं के माध्यम से विकास योजना के मार्गों के क्रियान्वयन का भी प्रावधान रखा गया है।
अफोर्डेबल हाउसिंग और पुनर्विकास पर जोर
योजना में किफायती आवास को प्रोत्साहित करने, क्रिएटिव री-डेवलपमेंट के जरिए पुनर्विकास और पार्किंग को बढ़ावा देने संबंधी प्रावधान शामिल किए गए हैं। विकास योजना के क्रियान्वयन के लिए पूंजी संग्रहण और प्रभावी पर्यवेक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित है।
सेफ सिटी और एआई सिटी की अवधारणा
भोपाल को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ’’सेफ सिटी’’ के प्रावधानों के साथ एजुकेशन, नॉलेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी की अवधारणा भी मास्टर प्लान में शामिल की गई है। इससे शिक्षा, ज्ञान आधारित गतिविधियों और तकनीकी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने की रूपरेखा सामने आती है।
मास्टरप्लान की  विशेषताएं
प्राकृतिक संवेदनशीलता सम्मत नियोजन,  आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव, महानगरीय अवधारणा के अनुरूप प्रस्ताव, ग्रोथ कॉरिडोर के माध्यम से आर्थिक विकास, राज्य की टीडीपी नीति के अनुरूप मिश्रित भूमि उपयोग के प्रस्ताव, असीमित एफएआर एवं भवन ऊंचाई, विकास मापदंडों का सरलीकरण एवं युक्त्युिक्तकरण, हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया, विकास योजना के क्रियान्वयन हेतु पूंजी संग्रहण, क्रिएटिव री-डेवलपमेंट के माध्यम से पुनर्विकास, अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रोत्साहन, हरित टीडीआर के प्रावधान, विकास योजना के क्रियान्वयन का प्रभावी पर्यवेक्षण, सेफ सिटी के प्रावधान,  पार्किंग प्रोत्साहन संबंधी प्रावधान, निजी विकासकर्ताओं द्वारा विकास योजा के मागों का क्रियान्वयन, एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  सिटी मास्टर प्लान की मुख्य विशंषताएं हैं।
कफ सिरप कांड पर पटवारी के सवाल, सरकार से मांगा जवाब
पटवारी बोले बच्चों की मौत को सरकारी फाइल न बनने दें
भोपाल। छिंदवाड़ा के जहरीले कफ सिरप मामले और प्रदेश में सामने आए कथित नशीली कफ सिरप नेटवर्क को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की औषधि निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल कफ सिरप से जुड़ी त्रासदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, औषधि प्रशासन और सरकारी निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।
पटवारी ने दावा किया कि रिपोर्ट के अनुसार छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में 24 से 25 बच्चों की असामयिक मृत्यु हुई, जिनमें बड़ी संख्या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की थी। उनके अनुसार बच्चों को सर्दी-खांसी के उपचार के लिए कफ सिरप दिया गया था, जिसके बाद गंभीर किडनी क्षति और बहु-अंग विफलता जैसी स्थितियां सामने आईं। उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कोल्डीफ्र के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6 प्रतिशत बताई गई, जबकि निर्धारित सीमा 0.1 प्रतिशत थी। पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि दवा में इतना विषाक्त पदार्थ मौजूद था तो निर्माता के साथ-साथ नियामक तंत्र की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र में सिरप लंबे समय तक बिकता रहा, लेकिन वैधानिक नमूना राज्य प्रयोगशाला नहीं भेजा गया।
जांच लंबित रहते बहाली का आधार क्या ?
उन्होंने 23 सितंबर 2026 के प्रशासनिक आदेश का भी मुद्दा उठाया। पटवारी के मुताबिक, तत्कालीन छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया था और बाद में विभागीय जांच शुरू हुई। इसके बावजूद 23 सितंबर 2026 के आदेश से उन्हें बहाल कर गुना में पदस्थ किया गया। पटवारी ने पूछा कि जांच लंबित रहते बहाली का आधार क्या था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में कोडीनयुक्त कफ सिरप के कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का उल्लेख है, जो 12 राज्यों तक फैला बताया गया है। इसमें 350 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए 20 लाख से ज्यादा बोतलों की अवैध बिक्री का दावा किया गया है। सागर में 72 हजार बोतलों की बरामदगी का भी उल्लेख है।
पारदर्शी जांच हो, जवाबदेही तय की जाए
पटवारी ने औषधि निरीक्षक के रिक्त पदों, प्रयोगशालाओं में उपकरणों और विशेषज्ञों की कमी पर भी सवाल उठाते हुए सरकार से पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत को केवल सरकारी फाइल नहीं बनने दिया जाना चाहिए। पीड़ित परिवारों को न्याय और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा मिलना चाहिए।


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